On this website, along with entertainment, you will get news of health, technology, and country and abroad. News posts are available in Hindi and English on our website.

Translate

Breaking

Tuesday, November 8, 2022

Dharm parivartan दूसरे धर्मों को नीचा दिखाने का दुष्प्रचार आपको हिंसक न बना दे।

   आप धार्मिक कट्टर हो रहे हैं या शिक्षित हो रहे हैं कभी अपने अंदर झाँककर देखो सायद हम भी गलत तो नहीं हो रहे हैं।

    धर्म के अंधे प्रचार में कहीं आप भी अंधे, बहरे, गूंगे तो नहीं हो रहे हैं। लेख को अंत तक पढ़ें मुझे यकीन है आपको जरूर पसंद आएगा।

1

Use Google Translate to read in your own language.




        आपने भी कुछ समय से एक बात को नोटिस करना शुरू किया है! आपके अन्दर आपके दिमाग में धर्म के नाम से कट्टरवाद बढ़ता जा रहा है। अगर नहीं बढ़ा है तो आप अपने पिछले कुछ दिनों को याद कीजिये क्या आपको अपने धर्म के लिए मर मिटने का गुस्सा आता था, आप याद कीजिये कि क्या आपको कभी ऐसा लगता था सिर्फ मेरा धर्म जिन्दा रहे और बाकी सब मर जाएँ! क्या आपको भी लगता था मेरा धर्म सबसे श्रेष्ट है? सायद नहीं! अगर यह सबकुछ पहले भी आपके दिमाग में चलता था तो पहले से ही मानसिक रोग में जी रहे हैं। और जिन सबके दिमाग में यह बात चल रही है उनकी संख्या बढ़ती जा रही है वह भी मानसिक रोगी हो रहे हैं।


धर्म के लिए आपके दिमाग में कट्टरता ऐसे ही नहीं भरी है। 

  • आपके अंदर अपने धर्म के प्रति मर मिटने की सोच भर दी गयी।
  • आपके दिमाग में अन्य धर्म के लोगों को मिटा देने से स्वर्ग मिलेगा ऐसा भरा गया।
  • अन्य धर्म के उन्मादी लोगों ने आपके धर्म को मिटाने की कोसिस की।
  • आपको दूसरे धर्मों का दुष्प्रचार भी बताया गया जिससे आप आपस में लोगों से बहस करने लगे और उसके परिणाम भी झेलने पड़े।
  • आप पहले सीधे साधे हुआ करते थे लेकिन कुछ दिनों में आपके सामने किसी अन्य धर्म को मानने वाले ने आपके धर्म को मानने वाले को मार दिया या अन्य कोई शोषण कर दिया। 
  • आप उस अन्याय को धर्म के नजरिये से देख रहे हैं तो आपके अंदर धार्मिक कट्टरता आएगी। आप उस अन्याय को सिर्फ अपराधी की नजर से देखा है तो सायद धार्मिक कट्टरता आपके दिमाग में कम आएगी।


     एक दुसरे धर्म का दुष्प्रचार करना लोगों के बीच हिंसा के कारण पिछली कई सदियों से होते रहे हैं। और वर्तमान में भी दुनियांभर में दो अलग अलग धर्म को मानने वाले लोगों के बीच दंगे होते आपने भी सुने होंगे।

     आपके सामने किसी अन्य धर्म को मानने वाले ने आपके धर्म को मानने वाले ने सच में धार्मिक कट्टरवाद से मारा है तो 100% आपके दिमाग में धार्मिक कट्टरवाद ही आएगा।


       कई न्यूज़ चैनल हैं जिन्हें आप भी जानते हैं धर्म के लिए लोगों में कट्टरता भरने वाले गानों को प्रमोट करते हैं और साथ में गाना लिखने वाले व गाने वालों को सम्मान देते हैं। लोगों के दिमाग में कट्टरता आये इन सबका जान बूझ कर प्रचार तंत्र बढ़ाया जा रहा है या फिर इस सवाल से अनजान बने हैं कि लोगों की मानसिकता उग्र हो रही है। इस सवाल का सटीक जवाब मेरे पास नहीं है सायद आपके पास हो।

      कुछ धर्म गुरु भी अपने प्रवचनो में काफिरों को कोई जीने का अधिकार नहीं है ऐसा बोलते हैं हमने खुद कई वीडियो में सुना है और आप तक भी जरूर पहुंचे होंगे। यह धर्म के नाम की कट्टरता समाज पर लगातार अपना दबाव बनाती चली जा रही है। कुछ दिन में इसके परिणाम आपके सामने जरूर होंगे।

     यह हम भी जानते हैं आप भी जानते हैं हिन्दू सनातन धर्म के सभी गुरु कट्टरवाद को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं, इस्लाम के सभी धर्म गुरु ख़राब नहीं हैं यहाँ तक की सभी धर्मों में कट्टरता भरने के लिए सभी धर्म गुरु ख़राब नहीं हैं। लेकिन कुछ गिने चुने लोग हैं जिनकी समाज में पहुँच अच्छी है ऐसे लोग समाज को आपस में ही सकून से जीने नहीं देंगे।

2

धर्म परिवर्तन भी लोगों में कट्टरता भरता है।

    कभी तलवार की नोंक पर धर्म बदलवाना, कभी लालच देकर धर्म बदलवाना, कभी शोषण करके धर्म बदलवाना, तो कभी गलत प्रचार से झूंठ बोलकर धर्म बदलवाना भी समाज पर गलत असर डालता है।

     जो मेरा धर्म है कोई तलवार की नोंक पर मेरा धर्म बदलवा दे तो सायद मुझ पर असर हो न हो कुछ दिन में हम खुद दूसरे धर्म में ढल जाएँ लेकिन जो मेरा पहले धर्म था उसको मानने वाले लोग गंभीरता से लेते हैं। व जिसने मेरा धर्म परिवर्तन करवाया है उसको दुश्मन की तरह देखते हैं।

     धर्म परिवर्तन भी कभी कभी तो लगता है कि अपने धर्म के लोगों का संगठन जनसंख्या बढ़ाने के लिए करवाया जा रहा है। और कभी कभी  लगता है कि नहीं धर्म परिवर्तन इसलिए करवाया जा रहा है ताकि धर्म का फैलाव अधिक क्षेत्र में हो सके।

इस लेख को लिखते हुए एक बात और समझ में आयी कि नहीं धर्म परिवर्तन इसलिए भी करवाया जाता है तो दो अलग अलग धर्मों को मानने वाले लोगों के बीच टकराव की स्थिति बन सके।

क्योंकि जिसने धर्म परिवर्तन करवाया है बो तो चला जायेगा। जब आप अपना धर्म बदलकर गली में निकलते हैं।

  • आप पहले जिस धर्म में थे वह लोग आपको देखकर हंस भी सकते हैं।
  • आप पर अभद्र टिप्पड़ी भी कर सकते हैं।

जिससे आपके बीच टकराव की स्थिति होती है उसकी लकीर बनना आरम्भ हो जाती है।

       एक बात और स्पष्ट कर दूँ जिसको लगता है कि में अपना धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपना लूंगा वहां शांति मिलेगी, कल्याण हो जायेगा।

      अरे भाई कहीं कुछ नहीं है। धर्म के नाम से शोषण आपका वहां भी किया जायेगा। यकीन न हो तो जिसने धर्म बदला है उसके दिल पे हाँथ रख के पूँछ लेना।

3

  आप किसी के धर्म के प्रचारक हों आपसे माफ़ी चाहता हूँ कुछ एक उदाहरण आपके धर्म से ले सकता हूँ जिसका बुरा न मानें।

     में अगर मोहम्मद साहब पर कोई टिप्पड़ी कर देता हूँ जो अभद्र हो। हमें सजा देने मोहम्मद साहब नहीं आयंगे। उनकी सक्तियां भी मुझे सजा देने नहीं आएंगी। लेकिन मुझे धमकाने के लिए सर कलम करने के लिए मुझे पीटने के लिए वर्तमान समाज के वो लोग आएंगे जो धर्म के नाम से कट्टर होते जा रहे हैं।

      मोहम्मद साहब का डर मुझे ही होना चाहिए और इंतजार करना चाहिए और जो भी गलती की है  मुझे उसकी सजा का परिणाम क्या मिलेगा?

     में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के लिए कुछ ऊट पटांग बोल दूँ तो मुझे सजा देने के लिए श्री राम नहीं आएंगे। और मुझे मेरे पाप करने की सजा किस तरह की यातना से मिलेगी इसका हिसाब भगवान श्री राम नहीं लेंगे।

लेकिन समाज के लोग ही मुझे मारने पीटने पर उतारू हो जायेंगे। और खुद ही मुझे सजा देंगे।

     में भगवान बुद्ध के खिलाफ कुछ बोल दूँ तब भी वही होगा जो ऊपर बताया है। यहाँ तक की में किसी भी धर्म के ईष्ट के खिलाफ कुछ बोल दूँ तो मुझे देने के लिए चुप रहने के लिए वैश्विक पटल पर दबाव तक बनाया जा सकता है।

    मेरी कोसिस यह है कि इस लेख से आपकी धार्मिक आस्था को ठेस न पहुंचे। हम चाहते भी नहीं कि किसी को कोई चोट पहुंचे।

   यह सिर्फ इसलिए लिखा है कि आप मुझे जबरन दबाव में लेकर यह साबित नहीं करना चाहते हैं कि ईश्वर शक्तिशाली है बल्कि आप ग्रुप के माध्यम से एकजुट भीड़ के माध्यम से यह साबित करते हैं की मेरा ग्रुप दबंग है।

    आप यह भूल रहे हैं शक्तिशाली ईश्वर है आप नहीं आप तो भीड़ का सहारा लेकर धर्म का सहारा लेकर जबरजस्ती में लगे हो।

4

अपने धर्म की विशेषता का प्रचार सभी को करना चाहिए और सच्चाई से करना चाहिए। लेकिन यदि हम अपने धर्म का प्रचार किसी अन्य धर्म के दुष्प्रचार से करना सुनने वालों के दिमाग पर गलत असर डालता है यह सब आपने भी महसूस किया होगा।

    लोगों के अन्दर अपने धर्म का दुष्प्रचार सुनकर भी कट्टर भावना उफान पर आ जाती है। किसी भी धर्म को नीचा दिखाने के लिए अपने धर्म का प्रचार करना ही

  • सामान्य स्थिर लोगों को आपस में लड़ाने के लिए किया जाता है।
  • धर्म को मानने वाले मासूम लोग चिंता में रहते हैं कि मेरे धर्म के लोगों के साथ गलत हुआ है।

सभी धर्म ग्रुप की अपनी अपनी पालिसी है अपने अपने नियम कायदे हैं। बो गलत हैं या सही हैं इस बात को समझने के लिए आपको अन्य धर्मों की शिक्षा और भाषा से दूर रखा जायेगा अगर आप पास जाओगे तो पाप और नर्क का डर भर दिया जायेगा।

नर्क मुझे मिलेगा पाप में भोगूंगा नर्क की यातनाओं का डर भी मुझे होना चाहिए लेकिन नहीं मुझसे जबरजस्ती डरने के लिए कहा गया है।



जातीय सूचक गाने।

    काफी समय हो गया है जबसे जातीय सूचक गाने बनने हुए थे। अगर कोई अहीर जाती का है तो अहीर जाती में रोष भरने वाले गाना आरम्भ हुए।

  • कोई ब्राम्हण है तो ब्राम्हण की प्रशंसा वाले गाने आरम्भ हुए.
  • ठाकुर कुल के गाने आरम्भ हुए।
  • प्रजापति के गाने आरम्भ हुए।
  • मौर्य वंश के गाने आरम्भ हुए।
  •  कोई मुसलमान है तो खान को ही महान बताने वाले गाने भी चलते हैं।
  • धर्म को बढ़ा चढ़ा कर पेस करने वाले गाने झूंठ सच मिलाकर भी समाज में पेस किये जाने लगे.

       आप जिस तरह से सोचते हैं हम सायद उस तरह से न सोचते हों। किसी भी वस्तु को देखकर उसके बारे में सोचना सबका समान नहीं हो सकता है।

      एक कब्बाली है जिसे आपने भी सुना होगा। ( मुसलमानो संभल जाओ  ये दुनियां जाने वाली है,  गुनाहों से करो तौबा कयामत आने वाली है।) यह गाना मेरे हिसाब से तो दुनियां के सबसे बेहतरीन गानों स भी ऊपर है।

  • इस गाने को इस्लाम मानने वालों ने लिखा और गाया साथ में संगीत भी दिया।
  • इस गाने से साबित होता है कि मुस्लिम समाज कुरीतियों की राह पर है उनसे दूर जाने को कहा है।
  • क्या हिन्दू धर्म को मानने वाले कुरीतियों को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं? क्या अन्य धर्म को मानने वालों के बीच कुरीतियाँ नहीं हैं।
  • अगर सभी धर्म के लोग अपने धर्म में हो रहीं कुरीतियों को सम्बोधित करते हुए गीत लिखें तो जो लोग धर्म के नाम पर अंधे हो रहे हैं सायद बो न हों।

   एक बात समझ नहीं आ रही है लोगों को धर्म के नाम से अंधा बनाया जा रहा है या धर्म का प्रचार करने वाले खुद अंधे हैं।

यहाँ तक की भारत में जातीय व्यवस्था के आधार पर जिस जाती का कोई भी लेखक हुआ वह उसी बिरादरी के गाने बनाने लगा बनाने लगा।

    उन गानों के हिसाब से लोगों में जातीय कट्टरता का असर जरूर हुआ होगा।

     अब समय बदल गया है धर्म सूचक गानों का खूब चलन है जिनका असर लोगों के मस्तिष्क पर लम्बे समय के लिए न होता हो लेकिन इस तरह के गानों की बजह से कई जगह दंगे हुए हैं यह तो आपने भी देखा होगा।

इस तरह से लोगों को धार्मिक कट्टर बनाने की कोई बडी साजिस ही हो सकती है।

   अगर धर्मों के बीच मौजूद कुरीतियों को प्रमोशन देने वाले करनामों को लिखा जाये तो कई पेज की पुस्तक लिख जाएगी। हम इस आर्टिकल को यहीं विराम देते हैं। अगर यह आर्टिकल लोगों के बीच पहुंचा और पसंद भी किया गाया तो आगे और भी लिखेंगे. धन्यवाद।











No comments:

Post a Comment

Total Pageviews

पेज