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Wednesday, August 3, 2022

electricity bill payment समय पर करें तो करें कैसे? भारत के बिजली उपभोक्ता bijli ke bill से परेशान हैं

        भारत में ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता बेहद परेशान हैं। लगभग 70% उपभोक्ता ऐसे हैं जिनसे उनकी खर्चा की हुयी बिजली से अधिक electricity bill payment बसूल किया जाता है।




         उत्तर प्रदेश में ही नहीं सायद पूरे भारत के ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत विभाग की धांधली आपको भी देखने को मिली होगी। दक्षिणाँचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ही नहीं सायद सभी आंचल विद्युत वितरण लिमिटेड यही कर रहे हैं। किसी एक कम्पनी का नाम लिखा है इसका मतलब यह नहीं है एक ही कम्पनी नुकसान कर रही है। विद्युत विभाग के द्वारा धांधली के मामले शहरों में भी देखने को मिलते हैं फिर भी ग्रामीण इलाकों से कम हैं। भ्रस्टाचार की अगर बात करी जाए तो दुनियाँ के सभी मामलों में भारत देश, भारत देश का विद्युत विभाग सबसे ज्यादा भ्रष्ट है। 


                                        


        दोस्तो अगर कोई भी विद्युत् विभाग का अधिकारी, मंत्री कहे या आपके दिमाग में अगर यह सवाल आता हो कि विद्युत् विभाग को घाटा हो गया यह बात बिल्कुल भी झूंठ ही रहेगी। भारत की अर्थवयवस्था में विद्युत् विभाग अपनी अहम भूमिका रखता है। भारत के विद्युत् विभाग से उपभोक्ता से लेकर विभागीय अधिकारी सभी चोरी करते हैं उसके बाद भी विद्युत् विभाग घाटे में नहीं रहता है। विद्युत् विभाग के अधिकारी लाखों में खेलते हैं। विद्युत् विभाग के ठेकेदार करोणों में खेलते हैं। जिसके घर या कम्पनी में बिजली का कनेक्शन है वह भी बिजली की चोरी करता है। वुद्युत विभाग में इतना घोटाला होने के बाद भी विभाग कभी घाटे में नहीं रहता है। 

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      -भारत में विद्युत् कनेक्शन लेने के नियम क्या हैं?

     भारत में विद्युत कनेक्शन लेने के नियम चाहे जो भी हों लेकिन विद्युत विभाग के पैसा वसूलने बाले नियम सबसे अलग ही हैं।

     -बिजली बिल जमा electricity bill payment करने के लिए 100 % ब्याज में छूट क्यों दी जाती है? बिजली के बिल में एकमुश्त समाधान की नौटंकी क्यों होती है।

       आप सोच रहे होंगे कि विद्युत् विभाग electricity bill payment में सरचार्ज माफ करता है यह बहुत अच्छी स्कीम होती है। आप भूल में हो स्कीम सिर्फ इसलिए होती है जिसने लगभग पिछले तीन या उससे अधिक वर्षों से अपने electricity bill payment नहीं किया है। बिजली का बिल जमा न होने कि वजह से विद्युत् विभाग सर चार्ज बहुत अधिक लेता है। ग्रामीण क्षेत्र में जिन व्यक्तियों ने बिजली का बिल समय पर जमा नहीं किया है  वह सभी जानबूझकर ऐसा नहीं करते हैं। सरकार के पैसे की बेईमानी करना लोगों की मंसा नहीं है। हो सकता है ऐसे कुछ लोग ही हों जो सरकार का पैसा हजम करना चाहते हों पर सब नहीं। समय पर बिल जमा न करने के कुछ कारण हैं।

  •        1- बिजली कनेक्शन होने के लगभग एक वर्ष बाद बिल आना शुरू होता है। जब बिल आता है तबतक उपभोक्ता से लगभग 470 रूपये प्रतिमाह के हिसाब से 12 माह का एक साथ बिल भेजा जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम लोग मजदूर होते हैं जो एक साथ इतना पैसा जमा करने को अनदेखा कर देते हैं।
  •           2- जिस दिन बिजली का कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ता के कागज जमा होते हैं बिजली का बिल उसी दिन से शुरू हो जाता है। हो सकता है बिजली के पोल से उपभोक्ता के घर तक 6 महीने बाद लाइट भेजी जाती है।
  •          3- जिस उपभोक्ता के घर टेलीवीजन, फ्रीज आदि आधुनिक सुबिधाये इलेक्ट्रिकल सामान नहीं हैं उसका भी बिजली का बिल एक महीने में लगभग 400 रूपये के लगभग है। जिसके घर बिजली की खपत बहुत अधिक है उसका भी इतना बिजली का बिल आ रहा है।
  •          4- ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का बिल मीटर की रीडिंग के हिसाब से नहीं बसूल किया जाता है बिजली के बिल की बकाया पर्ची पता नहीं किस अंदाज से भेजी जाती है।

        और भी बहुत ऐसी कमियां हैं विद्युत् विभाग में जिनकी वजह से ग्रामीण क्षेत्र से बिजली का बिल जमा नहीं होता है।अगर किसी अधिकारी को इस पोस्ट से झूंठ लगता है या आपको झूंठ लगता है तो सर्वे करवा लो इस बात का 

         जिस उपभोक्ता से उसकी बिजली खर्च से अधिक चार्ज पहले से ही लिया जा रहा है उसके लिए बिजली बिल में सरचार्ज माफी का ढोंग क्यों रचा जाता है। 100%  सरचार्ज माफ करने से भी विद्युत विभाग आप पर अहसान करके अपना घाटा नहीं कर रहा है न ही आपको कोई फायदा दे रहा है। आप जो भी भुगतान कर रहे हैं पहले से ही आपको बेवकूफ बनाकर एक्स्ट्रा लिया जा रहा है। आप जितना दे रहे हैं वह आपके द्वारा प्रयोग की गयी बिजली से बहुत अधिक है।

विद्युत विभाग के कर्मियों के कारनामें।

     यह एक असली मुद्दा है और यह मुद्दा सिर्फ उसी व्यक्ति का नहीं है जिसकी रसीद की तस्वीर हमने दिखाई है। ऐसी सैकड़ों, हजारों विद्युत उपभोकता परेशान हैं।। ग्रामीण क्षेत्र के एक परेशान उपभोक्ता से बात की वह काफी हड़बड़ाया हुआ था। लेकिन जब उसकी सभी रसीद देखीं तो कुछ देर सोचने के लिए में भी मजबूर हो गया। बाद में इंटरनेट से उसका बिजली का बकाया बिल देखा तो सब ठीक था कोई समस्या नहीं थी।


  नीचे जो तस्वीर दिखा रहे हैं इसमें उपभोक्ता का लगभग 10 वर्षों से बिल जमा न होने की वजह से लगभग 82900 बकाया था। बाद में जब 2 मई 2022 को जमा किया। जमा करते वक्त विद्युत उपभोक्ता से 30 हजार रूपये लिए गए। विद्युत उपभोक्ता की जमा रसीद में 21324 रूपये ही लिखे हैं। बाकी का रुपया दलाली में चले गए। विद्युत उपभोक्ता ख़ुश है कि मेरा 82 हजार बकाया था 30 हजार में ही निपट गया। लेकिन विभाग के खजाने में मात्र 21 हजार रूपये ही पहुंचे। ये तो हो गयी सरचार्ज माफ़ी की नौटंकी।



   विद्युत उपभोक्ता परेशान इसलिए हो गया 21 हजार जमा करने के 9 दिन बाद फर्जी बिल बनाने वाले ने फिर से 89 हजार की रसीद थमा दी। जबकि उपभोक्ता का कोई बकाया नहीं था। अगर बिजली बिल असली हर माह मीटर को देखकर निकाला जाये तो कोई समस्या नहीं होती। बिल बनाने वाले ने ऑफलाइन बिल बनाया है इसलिए यह समस्या उत्पन्न हुयी।

         -एकमुश्त समाधान योजना की नौटंकी को खतम किया जा सकता है।

        विद्युत विभाग ये जो एक वर्ष में दो बार एकमुस्त समाधान योजना या सरचार्ज माफ़ी योजना का ढोंग करते हैं इनको करने की कभी जरुरत नहीं होगी बस कुछ स्टेप अपनाने होंगे।

       - जिस उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन किया गया है जिस दिन से उसके घर बिजली पहुंची है उसके अगले प्रतिमहीने समय पर मीटर रीडिंग के हिसाब से बिल आने लगे तो उपभोक्ता पर जो एक साथ बोझ दिया जाता है बो नहीं आयेगा समय पर बिल जमा होगा एकमुश्त योजना की नौटंकी खतम।

        ग्रामीण क्षेत्र विद्युत विभाग धांधली से बिजली के बिल जमा करवाता है यह हम अपनी तरफ से नहीं लिख रहे हैं यह सब उसी के अनुसार है जिस हिसाब से लोगों के बिल आ रहे हैं। जिस उपभोक्ता का समय पर बिल आ रहा है उसके घर इलेक्ट्रिकल सामान भी है तो उसका बिल वही 200 रुपये के लगभग आता है। जिसका समय पर मीटर रीड नहीं होता है उसके घर सिर्फ दो बल्ब लगे हैं या बो भी नहीं हैं उसका बिल 400 आ रहा है। तो आप सोच भी नहीं सकते हैं कभी विद्युत विभाग को घाटा लगेगा।


       ग्रामीण क्षेत्र के लोग आखिर electricity bill payment समय पर क्यों नहीं जमा करते हैं?

     पिछली पोस्ट का लिंक दिया है ऊपर उसमें विद्युत् विभाग की ढील के बारे में ही लिखा है कुछ इस पोस्ट में लिख रहा हूँ। उत्तर प्रदेश विद्युत् विभाग ही नहीं सायद अधिकतम भारत का हाल यही है। ग्रामीण इलाकों में जिसके घर बिजली का कनेक्शन दिया जाता है उसके घर न ही बिजली का तार न ही बिजली का मीटर कुछ भी नहीं लगा होता है। जिस दिन बिजली का कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ता अपने दस्तावेज जमा करता है बिजली का बिल उसी दिन से शुरू हो जाता है।

       इस पोस्ट में जो तीन लोगों के विद्युत विभाग द्वारा नोटिस भेजे गये हैं। मौके पर तो बहुत लोग थे सबकी एक ही समस्या थी इन लोगों में कुछ लोग बिजली के बिल का भुगतान समय पर कर भी चुके हैं कुछ नये उपभोक्ता हैं कनेक्शन लेकर उसके बाद भी समय पर कोई मीटर की रीडिंग लेने नहीं आया जब आया तो 12 महीने या उससे अधिक महीनों के बकाया बिजली के बिल का नोटिस आया।

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       इस नोटिस में एक सरचार्ज है और बिजली का बिल। एक वर्ष में एक उपभोक्ता का बिल 400 रूपये प्रतिमाह है जो बिना किसी मीटर रीडिंग से निकाला गया है।जिसके घर गर्मी में एक या दो पंखे दो से तीन 10 wat के बल्ब जगते हों उसका भी बिजली का बिल 400 रूपये है जो उसके द्वारा प्रयोग की हुयी बिजली से अधिक है। उपभोक्ता का गला विद्युत विभाग ने पहले से ही दबा रखा है फिर यह सरचार्ज माफी योजना की नौटंकी क्यों है।।

        भारत में विद्युत् विभाग से किसानों के नुकसान -

        भारत में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के किसानों का नुकसान विद्युत् विभाग बहुत अधिक कर रहा है, यह सब आज से नहीं है न आप यह सोचने लगें कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो किसानों के साथ अन्याय कर रही है। उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ विद्युत् विभाग के द्वारा होते हुए अन्याय को पिछली सरकारों ने भी ध्यान नहीं दिया। उत्तर प्रदेश के अधिकतम क्षेत्रों में अप्रेल,मई,जून,जुलाई और अगर बारिश ठीक से होती है तो जुलाई, अगस्त और सितंबर इन महीनों में किसानों के ट्यूबल बंद ही रहते हैं फिर भी किसानों से बिजली के बिल में विद्युत् विभाग द्वारा कोई रियायत नहीं दी जाती है। चलो यह रियायत सायद इसलिए नहीं दी जाती है कि कमसे कम आपके ट्यूबल तक बिजली तो जा रही है आप प्रयोग करो या न करो।

      सबसे बड़ी किसानों के साथ धोखाधड़ी यह की जाती है अगर बरसात के मौसम में किसान के ट्यूबल तक की लाइन खराब हो जाती है, खम्बे टूट जाते हैं जो भी नुकसान होता है पुनः बनवाने के लिए जितना भी खर्चा होता है किसान से ही चार्ज लिया जाता है। किसान के पास अगर तत्काल पैसे नहीं हैं वह उस बिगड़ी हुयी विद्युत् लाइन को चार महीने बाद ठीक करवाता है। 4 महीने तक बिजली किसान के ट्यूबल तक नहीं पहुंची 0% भी बिजली का प्रयोग नहीं हुआ फिर भी किसान से बिल लिया जाता है। भारत में विद्युत् विभाग के यह नियम किसान के हित के लिए ही ठीक नहीं हैं तो किसानों का भला कैसे होगा। 6 से 7 महीने बिना बिजली का प्रयोग किये हुए बिजली का बिल लिया जाता है तो विद्युत् विभाग का कैसे नुकसान होगा हमेशा फायदे में ही रहेगा। यह सब ऐसे ही नहीं लिखा है किसान का बेटा में खुद किसान हूँ हालांकि मेरा टुबेल नहीं है, किसानों के बीच रहता हूँ जो किसान हैं उन्होंने खुद यह बताया कि मेरे टुबेल तक की लाइट भले ही एक वर्ष तक खराब रहे बिजली का बिल बराबर देना पड़ता है। कभी कोई जरूरत हुयी इस पोस्ट से किसी अधिकारी मंत्री को मिर्ची लगती हैं तो सबूत के सहित कन्फर्म कर दूंगा।

       -विद्युत् विभाग में घोटाला करने से किसका नुकसान होता है? 

       भारत विद्युत् विभाग या उसमें उत्तर प्रदेश विद्युत् विभाग इनके अधिकारी ठेकेदार लाखों करोणो रूपये का नुकसान विद्युत् विभाग का करते हैं जिसकी भरपाई सायद किसानों के खड़ ट्यूबेल के बिल से की जाती है। जिनके घर सिर्फ एक बल्ब ही लगा है या फिर कभी जिनके घर बिजली ही नहीं पहुंची है  उनके घर बिजली के बिल का नोटिस भेजा जा रहा है।

      - बिजली का बिल संसोधन।

     आपके bijli ka bill अगर संसोधित भी कर दिया जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपको और अधिक छूट दी गयी है। यह तो आपका वही electricity bill payment जो तीन या चार वर्षों में इतना ही होना चाहिये। एक व्यक्ति का 4 वर्षों में माना की नोटिस के हिसाब से 15000 बिल बकाया है। जिसमें लगभग 3000 रूपये सरचार्ज है अगर आप एकमुश्त योजना के द्वारा जमा करते हैं तो आपको सिर्फ 12000 रूपये ही जमा करने होंगे। इससे भी अधिक संसोधन होता है तो हो सकता है 7000 रूपये जमा करने होंगे। 4 वर्षों में जिसके घर सिर्फ एक दो पंखे एक दो लाइट हैं उसका तो ठीक ही है। 

    विधुत विभाग के अफसर और सरकार खुद बिजली उपभोक्ता की परेशानी से परेशान हैं 

    विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों के बीच से एक जानकारी अप्रेल 2022 में प्राप्त हुयी। विद्युत विभाग ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बिजली का बिल जमा करने का काम दिया। समूह से ही इक्षुक महिला विद्युत सखी का काम कर सकती है। यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। एक महिला को भी कमीशन पर रोजगार मिला लेकिन बहुत ही कठिन है। जब प्रशासन बिजली का बिल जमा नहीं करवा पाया तो विधुत सखी कैसे घर घर जाकर बिजली का बिल बसूल कर पायेगी। इस बारे में पोस्ट लिखी है जिसका लिंक यह है आप पढ़ सकते हैं। यहाँ सिर्फ आप विधुत विभाग की ढील के बारे में पढ़ें।


           विद्युत विभाग ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के बिजली का बिल निकालने में फिर भी काम नहीं कर रहे हैं। जिन लोगों को बिजली का बिल बनाने का काम मिला है उन्होंने ग्रामीण उपभोक्ता का बहुत बड़ा नुकसान किया है। अपने घर से ही लोगों के अनुमानित बिल बनाये। अनुमानित बिल बनाना गलत नहीं भी हो सकता है लेकिन जिस व्यक्ति के मीटर में 100 यूनिट खर्चा है उसके घर 200 यूनिट की रसीद भेजी गयी। मीटर को बिलकुल रीड ही नहीं किया गया।


   महिला विद्युत् सखी को बिल बनाने का काम भी मिलने वाला है। अगर लोगों के बिजली मीटर को पढ़कर सही बिल निकाला जाता तो बिजली उपभोक्ता की मुश्किल कम हो सकती है। अगर ऐसा ही फर्जी तरीका चलता रहा तो ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपभोक्ता की मुश्किल बहुत बढ़ जाएगी जो एक तरह से उपभोक्ता का शोषण करेंगी।


       इस पोस्ट का उद्देश्य यह नहीं है कि आप अपने बिजली का बिल जमा न करें। आप अपना बिजली का बिल जमा करें इस पोस्ट के द्वारा सिर्फ आपको यह बताना है आप अपने बिल की मीटर रीडिंग समय पर करवाएँ। यह छूट का पागलपन न पालें।

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