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Saturday, April 2, 2022

Panchayat Sahayak की भर्ती सरकारी पैसे की बर्बादी के सिवा और कुछ नहीं लगा।

     Panchayat Sahayak की भर्ती में पूरी तरह से गड़बड़ तो नहीं की गयी है फिर भी थोड़ी बहुत गड़बड़ की गयी है


       Panchayat Sahayak की भर्ती ग्राम पंचायत सचिवालय, Panchayat Sahayak की भर्ती, ग्राम पंचायत सचिवालय सहायक भर्ती, ग्राम प्रधान सहायक की भर्ती में घोटाला।



        Panchayat Sahayak की भर्ती मान्यनीय योगी आदित्यनाथ सरकार में निकाली गयी थी। जिसके बारे में आपने भी सुना होगा। ग्राम प्रधान सहायक की भर्ती के लिए क्या क्या गाइडलाइन थीं ये भी आपको पता होगा। ग्राम प्रधान सहायक की भर्ती के लिए क्या क्या जरुरी था यह सब आपको नहीं पता है तो में बताता हूँ।

  • (1)-Panchayat Sahayak के लिए 2021 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में जिस प्रकार से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए जो आरक्षण था उसी आरक्षण के हिसाब से ग्राम पंचायत सहायक की भर्ती होनी थी।
  • (2)-जैसे की अगर किसी ग्राम पंचायत में पिछड़े वर्ग की महिला ग्राम प्रधान है तो वहां पर एक पिछड़े वर्ग की महिला को भर्ती किया जायेगा। अगर किसी ग्राम पंचायत में सामान्य वर्ग का पुरुष प्रधान है तो सामान्य वर्ग का व्यक्ति ही Panchayat Sahayak बनाया जायेगा।
  • (3)- Panchayat Sahayak के लिए इंटरमीडिएट अच्छी मेरिट से पास होना अनिवार्य था। एक ग्राम पंचायत से जितने भी आवेदन हुए सभी आवेदनों में जिसकी मेरिट सबसे अच्छी होगी उसी को Panchayat Sahayak बनाया जायेगा।
  • (4)- आवेदन कर्ता ग्राम पंचायत सहायक बनने के लिए सिर्फ अपनी ग्राम पंचायत में आवेदन कर सकता था ।
  • (5)- कंप्यूटर चलाने की थोड़ी बहुत बेसिक जानकारी होनी चाहिए। जैसे डाटा इंट्री, ऑनलाइन आवेदन करना।
  • (6)- Panchayat Sahayak के लिए मौजूद ग्राम प्रधान के परिवार या रिस्तेदार को भर्ती नहीं किया जायेगा कुछ इस तरह की गाइडलाइन थीं। पर हमारे भारत में भ्रष्टाचार के चलते यह सब कैसे संभव हो सकता है। एक भी गाइडलाइन नहीं मानी गयी। Panchayat Sahayak की भर्ती प्रकिया ऐसे हुयी जैसे नहीं होनी चाहिए थी।


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Panchayat Sahayak की भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी।

        Panchayat Sahayak की भर्ती में पूरी तरह से गड़बड़ तो नहीं की गयी है फिर भी थोड़ी बहुत गड़बड़ की गयी है। फिर भी किसी भी भर्ती प्रक्रिया में थोड़ी सी गड़बड़ी ठीक नहीं होती है। भारत का भविष्य वही लोग तय करते हैं जो सिविल सर्विस में प्रशासन के काम में अपना योगदान दे रहे हैं। जब सिविल सर्विस में अपना योगदान देने वाले लोग खुद का भविष्य ठीक से तय नहीं कर पा रहे हैं तो लोगों का भविष्य कैसे सुधारा जा सकता है।


        Panchayat Sahayak की भर्ती प्रक्रिया में जिन लोगों को भर्ती किया गया जिनको कंप्यूटर की बेसिक जानकारी तो क्या अपने मोबाइल के बारे में ठीक से पता नहीं है। अधिकतम भर्ती होने वाले लोग अपने मोबाइल पर आने वाले ईमेल सन्देश को नहीं निकाल पाते हैं। अधिकतम लोग तो ऐसे हैं जो ऑनलाइन फॉर्म भी नहीं भर सकते हैं। एक दो लोगों के पास बैठने का मौका लगा तो उनसे इसारे में पूंछा कि एक्सल सीट पर डाटा एंट्री कैसे करते हैं? तो एक ग्राम प्रधान सहायक ऐसा था जो एक्सल ही नहीं जानते थे। हमने ये सब पता एक पत्रकार बनकर तो कर नहीं पाया क्योंकि हम हैं ही नहीं। अपनी पोस्ट पर लिखने के लिए कई एक लोगों को मित्र बनाकर पता कर पाया।

          Panchayat Sahayak की भर्ती में जिसे सामिल किया गया वह भले ही कुछ नहीं जानता हो उसमें बुराई की भी बात नहीं होनी चाहिए। जब ग्राम पंचायत के लोग एक बोतल शराब और मुर्गे में कम पढ़ा लिखा ग्राम प्रधान चुन लेते हैं तो सहायक का पढ़ा लिखा होना मायने नहीं रखता है। ग्राम विकास अधिकारी से रिश्वत के जरिया से अपना काम कैसे निकाला जाये ये सब जानकारी प्रधान को होनी चाहिए बाकी की गाइड लाइन खुद ग्राम विकास अधिकारी करवा देते हैं। सुनने में तो ये तक आया और सच्चाई है कि एक ग्राम विकास अधिकारी एक ग्राम प्रधान से महीने में 50 हजार रुपये के लगभग कमाई रिश्वत के रूप में करता है। एक ग्राम विकास अधिकारी के निचे कमसे कम 3 ग्राम प्रधान होते हैं आप अंदाजा लगा सकते हैं कितनी रिश्वत का सोर्स जुडा होता है।

          Panchayat Sahayak की भर्ती होने से पहले जनसेवा केंद्र संचालकों ने सोसल मिडिया पर प्रार्थना पत्र और और विरोध की भाषा में लिखे हुए आक्रोश पत्र घुमाये। जिनमें लिखा था कि हम लोग रात में भी सरकार का काम करते हैं मेहनत करते हैं तो मुझे क्यों नहीं भर्ती किया गया। अगर ग्राम पंचायत सहायक को लगा दिया जायेगा तो मेरा रोजगार जो चल रहा है वह भी छीन लिया जायेगा। मोबाइल to मोबाइल सन्देश चलते रहे फिर भी हुआ कुछ नहीं।

          हालांकि Panchayat Sahayak की भर्ती में भर्ती हुए लोगों की  इंटर की परीक्षा में अच्छे अंक थे। वह अंक आये कैसे ये सब तो आप लोग जानते ही हैं। जिन लोगों को ग्राम प्रधान सहायक की भर्ती में लिया गया उनको एक टेलेंट तो कूट कूट कर भरा था बो था फेसबुक कैसे चलाया जाता है इंस्टाग्राम कैसे चलाया जाता है, टिकटॉक, इंस्टाग्राम रील्स आदि जैसे app कैसे चलाये जाते हैं, बार बार व्हाट्सप्प सन्देश कैसे देखे जाते हैं?

       हम इस पोस्ट के माध्यम से यह नहीं चाहते हैं कि किसी को सरकार ने Panchayat Sahayak के  रूप में रोजगार दिया है तो उसका छीन लिया जाये। जैसे भी ले देकर Panchayat Sahayak की भर्ती की गयी है तो कमसे कम काम भी तो होना चाहिए। Panchayat Sahayak के पास कोई काम ही नहीं है। सिर्फ पूरे दिन बैठना है और तनख्वाह आ रही है।


    चलो मान भी लेते हैं कि Panchayat Sahayak के पास काम है अब चाहे खुद का हो या ग्राम प्रधान का हो लेकिन काम तो है। अगर ग्राम प्रधान का काम नहीं है तो समाज का काम तो होना चाहिए जिसके लिए सरकार तनख्वाह दे रही है। हो सकता है कि हम जब जब ग्राम प्रधान सहायक के कक्ष में जाने का अवसर प्राप्त किये तो वहां ग्राम प्रधान सहायक ही नहीं थे। जब कभी मिले तो फेसबुक और व्हाट्सप्प में रील्स देखने में बिजी थे। तो कैसे मान लूँ कि ग्राम प्रधान सहायक के पास भी कोई काम है।


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      Panchayat Sahayak के पास कोई काम नहीं है इसका जीता जागता उदाहरण ऐसे समझ सकते हैं। नीचे जो फोटो दी गयी है यह फोटो अप्रेल 2022 की है। यह फोटो पंचायत भवन की ही है और उस कमरे की है जहाँ ग्राम प्रधान सहायक का कार्यालय होता है। जब Panchayat Sahayak को डाटा एंट्री आदि जैसे काम के लिए भर्ती किया गया है। और गौर से देखिये सिर्फ मॉनिटर तो है सी पी यू गायब है। जब सीपीयू ही गायब है तो डाटा एंट्री कैसे होती है. इसलिए ही यह पोस्ट लिख रहा हुँ कि ग्राम प्रधान सहायक के पास कोई काम ही नहीं है सिर्फ सरकारी पैसे की बर्वादी है।

Panchayat Sahayak के पास कोई काम नहीं है


      यह फोटो कहाँ की है यह इसलिए नहीं लिख सकता हूँ क्योंकि यह कोई न्यूज़ वेबसाइट नहीं है। लेकिन फोटो एकदम सच है।


Panchayat Sahayak की भर्ती क्यों की गयी है?

    Panchayat Sahayak की भर्ती क्यों की गयी है इस सवाल का सही उत्तर तो हम नहीं दे सकते हैं। पर जो कुछ दिन में सामने निकल कर आएगा वह जरूर सही होगा। Panchayat Sahayak ग्राम के पंचायत भवन में बैठेगा और ग्राम विकास के जो भी कार्य होंगे उनका लेखा जोखा सायद।  ग्राम प्रधान सहायक की भर्ती अगर इसलिए की गयी है भ्रष्टाचार पर नकेल कस सके तो यह मुमकिन नहीं है। जिसको भी ग्राम प्रधान का सहायक बनाया गया है वह प्रधान का रिलेटिव है भ्रस्टाचार दोनों मिलकर करेंगे। आज के लिए बस इतना ही मिलते हैं अगली किसी नयी पोस्ट में।



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