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Friday, November 12, 2021

आप सभी ने लेबर कार्ड के बारे में सुना होगा और लेबर कार्ड के बारे में जानते भी होंगे।

       लालच में श्रमिक कार्ड उन्होंने भी बनवा लिए जो अन्य बिजनेस से लाखों महीना कमा रहे हैं।


श्रमिक कार्ड पंजीकरण कैसे करें? 


    लेबर कार्ड और श्रमिक कार्ड एक ही होता है। शिक्षा के आभाव में कुछ मित्र लेबर कार्ड और श्रमिक कार्ड में अंतर समझ लेते हैं बो लोग जानबूजकर अशिक्षित नहीं हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ( ministry of labour & employment ) के द्वारा ही एक नयी शुरुआत वर्तमान भारत सरकार ने सुरु की है। श्रमिक या लेबर कार्ड पहले उन लोगों के बनते थे जो कहीं निश्चित समय तक काम करते थे बो भी किसी रजिस्टर्ड कम्पनी में या ऐसे समझो किसी मजदूर संगठन में सामिल होकर। अब यह श्रमिक कार्ड प्रत्येक मजदूरों के लिए बनाया जा रहा है जो किसी के घर जाकर भी मजदूरी करता है। 


     आपने श्रमिक कार्ड या लेबर कार्ड के बारे में बहुत पहले से सुना होगा। लेकिन बहुत पहले यह होता था श्रमिक कार्ड सिर्फ उन्ही लोगों के बनाये जाते थे जो किसी कम्पनी में काम करते थे, लेबर कार्ड सिर्फ उन लोगों के बनते थे जो किसी लेबर संगठन से जुड़कर काम करते थे, श्रमिक कार्ड उन लोगों के बनते थे जो रोजगार सेवक के नीचे मनरेगा में काम करते थे। या पी डब्लू डी विभाग में मजदूरी करते थे। किसी खदान आदि में जो मजदूर काम करते थे उनके लेबर कार्ड बनाये जाते थे।


     नये दैनिक मजदूर जिनके श्रमिक कार्ड बनाये जा रहे हैं उनका भी यू एन नम्बर जनरेट होता है। आप में से जिस किसी ने किसी कम्पनी में काम किया है तो वहां भी आपका एक पी एफ नम्बर एक यू एन नम्बर बनाया जाता था। ठीक  वैसा ही यू एन नम्बर अब प्रत्येक मजदूर का जारी किया जा रहा है। आपके आसपास कोई मजदूर हो जिसका लेबर या श्रमिक कार्ड नहीं बना है आप उस तक सूचना पहुँचा दें वह अपने किसी नजदीकी जनसेवा केंद्र पर बनवा लें। श्रमिक कार्ड बनवाने के लिए अपना आधार कार्ड बैंक पासबुक और अपना मोबाइल नम्बर लेकर जाएँ। आपका लेबर कार्ड बनाने का कोई चार्ज नहीं लगेगा श्रमिक कार्ड बिल्कुल निशुल्क बनाया जायेगा, जनसेवा केंद्र संचालक को सरकार एक श्रमिक कार्ड बनाने का 20 रुपये के आसपास दे रही है। अगर कोई जनसेवा केंद्र संचालक 30 रुपये तक ले भी रहा है विरोध आप उसका भी कर सकते हैं। अगर उससे अधिक चार्ज जैसे 50 रुपये उससे भी अधिक 200 रुपये भी कहीं कहीं बसूले जा रहे हैं। आप बिल्कुल भी रुपये न दें किसी प्रकार का डर भी न रखें कि मेरा श्रमिक कार्ड नहीं बन पायेगा। श्रमिक कार्ड हमेसा बनते रहेंगे। 


                                       श्रमिक कार्ड बनवाने का मतलब क्या है?

    श्रमिक कार्ड बनवाने का मतलब क्या है?


     जो मजदूर आज किसी किसान के खेत में काम करने गया है वह कल किसी और किसान के खेत में काम करने जायेगा उसका लेबर कार्ड नहीं बनता था। ईंट भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर उन सभी के कार्ड भी नहीं बन पाते थे। जो लोग रिक्शा चलाकर भारी सामान आदि ढोया करते थे उनके भी लेबर कार्ड नहीं बन पाते थे। आप अगर किसी डॉक्टर के यहाँ सहायक के रूप में काम कर रहे हैं, आप अपना कोचिंग सेंटर चला रहे हैं, आप किसी मालिक का वाहन चला रहे हैं, आप किसी का भवन बनाने में मिस्त्री का काम करते हैं या लेबर का काम करते हैं, अगर आप खेती में जो भी उत्पादन करते हैं जो कृषि क्षेत्र की श्रेणी में आते हैं उस सभी लोगों के लेबर कार्ड बन सकते हैं। यहाँ तक की जो आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिनके लेबर कार्ड नहीं थे उन सभी के कार्ड बन सकते हैं। और भी बहुत तरह के मजदूर थे जिनके लेबर कार्ड नहीं बन पाते थे।

      श्रमिक कार्ड बनवाने का मतलब क्या है?

वर्तमान सरकार ने यह अच्छी पहल की है श्रमिक कार्ड उन मजदूरों के भी बनाये जा रहे हैं जो अपनी दैनिक मजदूरी आज यहाँ कल वहां करते थे चार दिन काम मिल भी गया कहीं उसके बाद काम न होने की वजह से बैठे हैं। उन मजदूरों का कोई सरकारी डाटा नहीं था। अब श्रमिक कार्ड उन मजदूरों का बनना संभव हो गया है जो असंगठित कामगार थे। श्रमिक कार्ड के द्वारा असंगठित कामगारों का राष्ट्रीय डेटाबेस एकत्रित करना है।


        लेबर कार्ड के क्या लाभ हैं? श्रमिक कार्ड के क्या लाभ हैं?

    लोगों के अनुसार और लेबर कार्ड की आधिकारिक वैबसाइट के अनुसार श्रमिक कार्ड से मजदूरों के लाभ में फर्क है। पर आधिकारिक वैबसाइट पर जो लिखा गया है वही सच है।

श्रमिक कार्ड के लाभ आधिकारिक वैबसाइट के अनुसार - भविष्य में अगर कभी भी कोविड-19 जैसी महामारी का सामना होता उस संकट से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को एक व्यापक डेटाबेस उपलब्ध करवाना है।

अब बात कर लेते हैं लेबर कार्ड बनाने में दलाली के बारे में।

लेबर कार्ड में दलाली का करने का तरीका?

श्रमिक कार्ड में दलाली करने के तरीके.

      लेबर कार्ड के लाभ क्या हैं श्रमिक कार्ड की हानि क्या है? हमारी वैबसाइट इस बात को चाहे भले ही न बता पाए, लेकिन दलाली और घोटाले की प्रोसेस से भली भांति परिचित करवाने का हर संभव प्रयास करते हैं। गूगल या अन्य विज्ञापन दाता को इस वैबसाइट के लेख अहम् नहीं लगते हैं। वो न लगें हमें उससे फर्क नहीं पड़ता है। इस वैबसाइट पर आने वाले यूजर का अनुभव भी अच्छा नहीं रहता है कोई बात नहीं सायद कल कुछ अच्छा लगने लगे। भारत में दलाली के बिना कोई भी कार्य पूर्ण तरीके से सम्पन्न हो ही नहीं सकता है।

        वही दलाली इस लेबर कार्ड में चल रही है। किसी एक निश्चित जगह का नाम बताऊँ तो आपको यही लगेगा कि वही आदमी ख़राब है वही जगह ख़राब है। ख़राब तो भारत के अधिकतम लोग हो चुके हैं। जिस मजदूर की पूरे माह जी तोड़कर मेहनत करने के बाद 5000 रुपये के लगभग बचत भी न हो पाती हो। दलाली खाने वाले दिल्ली में मजदूरों से 500 रुपये लेबर कार्ड बनाने का ले रहे हैं। मुंबई में 1000 हो सकते हैं उत्तर प्रदेश में 500 नहीं तो 400 रुपये लग ही रहे हैं।


        जब असंगठित कामगारों के लेबर कार्ड नहीं बन रहे थे उसके पहले मनरेगा में जुड़े रोजगार सेवक 300 रुपये 1 लेबर कार्ड बनवाने की फीस ले रहे थे। जो मजदूर पी डब्लू डी में मजदूरी करते थे उनसे लेबर कार्ड बनवाने के लिए उनके खुद के सीनियर लोग 200 से 500 रुपये तक दलाली ले रहे हैं।

      यह सब देखकर सरकार भी चिंतित नहीं है कि गरीब मजदूरों को प्रत्येक सरकारी लाभ दिलवाने से पहले कितना अधिक लूटा जा रहा है। सरकार इस लिए चिंता में नहीं रहती है उन्हें छोटी मोटी बातों से लेना देना नहीं है। अधिकारी चिंता करेंगे भी नहीं उनका कमीशन दलालों से ही आ रहा है।


     श्रमिक कार्ड में दलाली का के कुछ कारण हैं जो कार्ड बनवाने वाले से लेकर बनाने वाले दोनों लोगों की कमजोरी की वजह से है।


      सबसे पहले तो जिसको अपना लेबर कार्ड बनवा लेना चाहिए वह घर से ही नहीं निकल रहा है। सितम्बर 2021 में श्रमिक कार्ड बनवाने के लिए गांव गांव कैंप किये गए फिर भी लोग घर से नहीं निकले। श्रमिक कार्ड बनवाने के लिए कैंप में कोई चार्ज भी नहीं था लोग फिर भी अपने घर से नहीं निकले। कुछ लोग अपने घर से निकलकर अपना लेबर कार्ड बनवाने के लिए आये भी तो सरकारी वैबसाइट इतनी स्लो होती हैं जरा सा भी ट्रेफिक बढ़ा वैबसाइट ही जाम हो जाती हैं। वही हाल register.eshram.gov.In का है। जब भी किसी जनसेवा केंद्र तक या कैंप तक लोग अपना लेबर कार्ड बनवाने पहुंचे तो पता चला साइड ही नहीं चल रही है। इस वजह से लोगों ने लेबर कार्ड बनवाने के लिए दिलचस्पी ही नहीं ली।


        कैंप में काम करने वाला जनसेवा केंद्र संचालक भी वेवसाइट से परेशान होकर कार्ड बनाना बंद कर देता है। उसके बाद जब पुनः जब वेबसाइट ठीक चलना सुरु होती है वही से सुरु होता है लेबर कार्ड बनाकर एक्स्ट्रा रुपये कमाने का सिलसिला।


        उत्तर प्रदेश में ही नहीं जिस प्रदेश में श्रमिक कार्ड बनाए जा रहे हैं वहां पर मजदूरों से दलाल और जनसेवा केंद्र संचालक एक कार्ड बनाने का 100 रुपये से लेकर 250 रुपये से भी अधिक लेबरकार्ड बनाने के रूपये ले रहे हैं। यह एक छोटा सी समस्या है सायद किसी का ध्यान इस ओर नहीं जायेगा। यह छोटी सी समस्या नहीं भी हो सकती थी अगर ग्राम प्रधान ओर ग्राम विकास अधिकारियों ने लोगों तक सही सूचना पहुँचाने का काम किया होता।


        एक गांव में जब हम श्रमिक कार्ड का कैंप करने गए क्योंकि हम भी एक vle हैं एक जनसेवा केंद्र चलाते हैं। हमारे पास अन्य जनसेवाकेंद्र संचालकों की तरह पैसा नहीं है क्योंकि हमने अभी तक अपने केंद्र को लूट का साधन नहीं बनाया है। भविष्य में अगर कभी लालाच आ गया पैसा कमाने का तो कुछ न कुछ जरूर करेंगे। तो वहां के लोग भी मन से कार्ड बनवाने के लिए नहीं आ रहे थे। क्योंकि उनके बीच में एक ऐसा व्यक्ति जो वर्तमान सरकार को पसंद नहीं करता था वह विपक्ष की चमचागिरी करते हुए लोगों के बीच में अफवाह फैला रहा था कि अगर आप अपना लेबर कार्ड बनवाओगे तो आपके हर महीने खाते से रुपये सरकार काटेगी। भारत में किसी भी सरकारी काम का लाभ लेने से पहले अफवाह अपनी जगह बना लेती है यह अबसे नहीं है। उस अफवाह की वजह से लोगों के बीच संका थी उसको मिटाने के लिए वहां पर एकत्रित भीड़ को बहुत देर तक समझाना पड़ा तो कुछ लोगों को समझ में आया कुछ लोगों को उस चमचे की बात ही सही लगी।

आप सभी से अनुरोध है कि आप अपना  श्रमिक कार्ड बनवा लें किसी अफवाह आदि पर ध्यान न दें।

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