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Tuesday, November 16, 2021

30 दिन से अधिक इंतजार करना होता है किसानों को धान बेचने के लिए।

    30 दिन से अधिक इंतजार करना होता है किसानों को धान बेचने के लिए।


       उत्तर प्रदेश धान का रेट 2021 दलाल को रुपये प्रति कुंतल 1200 । धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1940 / 1960 रुपये प्रति कुंतल

धान का रेट


    30 दिन से अधिक इंतजार करना होता है किसानों को धान बेचने के लिए। धान बेचने के रजिस्ट्रेशन लगभग 20 दिन तक लंबित ही रहते हैं। खरीद हेतु किसान पंजीकरण , धान खरीद हेतु पंजीकरण


      सरकार की भाषा में किसान को तकलीफ नहीं होनी चाहिए। लेकिन सरकारी कर्मचारियों की वजह से किसान कहीं न कहीं परेशान ही रहता है। किसान की जो भी कमाई है वह फसल ही होती है, जिसमें से अपनी जरुरत के लिए बचा लेता है बाकी का अनाज और जो भी खाद्य सामिग्री है उसे बेंच देता है। किसान को अपनी फसल बेचने के लिए सही रेट नहीं मिलता है यह समस्या बनी ही रहती है। साथ ही किसान के लिए एक नयी समस्या को जन्म कर्मचारी देते हैं।



     उत्तर प्रदेश राज्य में ही नहीं सायद पूरे भारत का यही हाल है। किसान अपनी फसल बेचने के लिए जब भी तैयारी बनाता है तो बहुत सी अटकलें जिनसे सामना करना पड़ता है। किसान को पैसे की जरुरत आज है आज नहीं तो कल उसकी जरुरत पूरी हो जाये कल भी नहीं दो दिन बाद उसकी जरूरत पूरी हो जाए तब भी फर्क नहीं पड़ता है। पर किसान को पैसे की जरुरत आज है और उसकी फसल 1 महीने बाद बिक पाए फसल बिकने के बाद 10 दिन से अधिक समय के बाद पैसा मिले इस तरह से किसानों का भला कैसे होगा?


    समय पर फसल उन लोगों की बिक रही हैं जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर ओने पौने दाम में किसानों से फसल खरीद रहे हैं। किसान अपना रजिस्ट्रेशन धान बेचने के लिए करवाता है। रजिस्ट्रेशन होने के बाद किसानों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की जाँच होती है। जाँच में किसान के पास धान की मात्रा के हिसाब से जमीन है तो किसान का फार्म सत्यापित हो जाता है। किसान को अपने धान बेचने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बाद 20 दिन से अधिक इंतजार इस बात के लिए करना पड़ता है कि उसका फॉर्म सत्यापित हुआ है या नहीं। सत्यापित होने के बाद किसान तैयारी करके धान खरीद केंद्र पर किसान को 3 दिन से अधिक टाइम भी लग जाता है। उसके बाद 15 दिन के आसपास किसान के खाते में पैसे आ पाते हैं।


        जो दलाल किसानों से 1200 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से धान खरीदते हैं और अपने मित्रो आदि की मदद से अपना धान सरकारी खरीद केंद्र पर बेचते हैं। धान का सरकारी खरीद केंद्र पर लगभग 1940 रुपये प्रति कुंतल का रेट रहता है। दलाली करने वाला व्यक्ति 760 रूपये कुंतल के हिसाब से बचत कर लेता है। सरकार की नजरों में किसान का धान 1940 रुपये प्रति कुंतल ख़रीदा जा रहा है जबकि किसान को 1200 रुपये प्रति कुंतल का रेट ही नसीब हो रहा है। दलाल जब अपना रजिस्ट्रेशन धान बेचने के लिए करवाते हैं तो आज रजिस्ट्रेशन करवाया पहली बात तो यह है कि उसी दिन सत्यापन हो जाता है। अगर सत्यपान में किसी कारणवस समय अधिक लग रहा है तो अगले दिन सत्यापन हो जाता है जबकि किसान के फॉर्म का सत्यापन 20 दिन का समय लेता है। हो सकता है कुछ किसानों के सत्यापन कम समय हो भी जाते हैं पर सभी के नहीं। अगर किसान को भी अपने फॉर्म का सत्यापन जल्दी करवाना है तो उसे तहसील तक जाना होता है और सत्यापित करने वाले को 50 रूपये तक दे दो तत्काल सत्यापन हो जाता है।


        सरकार का कहना है कि किसान की आय को दोगुना करना है। आपको लगता है कि भ्र्स्ट कर्मचारी किसान की आय को दोगुना होने देंगे। 1940 रूपये प्रति कुंतल बिकने वाला धान किसान 1200 रुपये में बेचा रहा है। किसान अपना धान 1940 रुपये में बिकने के लिए 1 महीने से अधिक समय तक इंतजार नहीं कर सकता है। क्योंकि उसे बहुत सी जरूरतें हैं अगली फसल बोने की तैयारी करनी होती है। सभी किसानों के पास इतना बजट नहीं हो पाता है कि यह फसल जब बिकेगी तब बिकती रहेगी जो पैसे घर पे रखे हैं उन्ही से काम चला लें।


        धान खरीद के लिए दलालों के फॉर्म जल्दी सत्यापित क्यों हो जाते हैं?

       जो व्यक्ति 760 रूपये प्रति कुंतल के हिसाब से कम समय में कमा रहा है वह 100 से 500 रुपये तक की रिश्वत देने में बिल्कुल नहीं चूकता है। किसी जनसेवा केंद्र से अपना रजिस्ट्रेशन करवाया और जिस व्यक्ति को फॉर्म सत्यापित करने का काम दिया गया है उसके पास तुरंत कॉल की जाती है या उसके पास जाया जाता है। रजिस्ट्रेशन नम्बर बताकर तत्काल सत्यापन होता है। सत्यापन करने वाला सरकारी तनख्वाह के बाद भी प्रत्येक सत्यापन पर अपनी ओकात के हिसाब से 20 से लेकर 100 रुपये तक रिश्वत लेता है।


दलाल अपना अनाज बेचते कैसे हैं?

      पहल स्टेप - अपने क्षेत्र के छोटे किसनों से धान 1200 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से खरीद लिया। और धान की मात्रा का अंदाजा लगाया कि धान कितना इकठ्ठा हुआ है।

       दूसरा स्टेप - अपने दोस्त अपने पडोसी अपनी पत्नी जिसके नाम भी जमीन है उन सभी का जमीन के हिसाब से धान की लिमिट बनवा कर रजिस्ट्रेशन करवा दिया।

       तीसरा स्टेप - रजिस्ट्रेशन के बाद फॉर्म को सत्यपान करवाया और धान सरकारी खरीद केंद्र पर बेच दिया।


     अब पैसे जब आएंगे तब आते रहेंगे महीने 15 दिन में, एक महीने में लाखों रुपये दलालों ने कमा लिए एक किसान के रजिस्ट्रेशन का सत्यापन 20 दिन में पूरा नहीं होता है। यह है मेरा अतुल्य भारत। किसान बिल हालांकि कहीं न कहीं किसानों के हित में थोड़े कमजोर हैं। किसान बिल इतने ख़राब भी नहीं हैं इतनी खराब भी नहीं हैं जितनी बिपक्ष के द्वारा छवि बिगाड़ी जा रही है। किसान बिल की वजह से सबसे अधिक परेशानी इन्ही दलालो की बजह से है एक पोस्ट इसी के बारे में हैं जिसका लिंक खोलकर पढ़ सकते हैं।

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