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Wednesday, October 20, 2021

भारत की राजनीत में चुनावी हिन्दू बनना बेहद जरुरी है क्या?

    भारत की राजनीत में वोट मांगने के लिए हिन्दू बनने का ढोंग करना आम बात हो गयी है। भारत में वोट पाने के लिए हिन्दू बनना पड़ता है,हिन्दू बनो वोट लो।



 हिन्दू बनना पड़ता है


       भारत एक ऐसा राष्ट्र है जहाँ पर सबसे अधिक हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। हिन्दू धर्म या सनातन धर्म की विचार धारा मानने वाले लोगों के वोट कैसे हासिल किये जाएँ। भारत की राजनीती में वोट मांगने के लिए आपको धार्मिक होना जरुरी है। आप भले ही किसी अन्य धर्म में जन्मे हों वोट मांगने के लिए हिन्दू बनकर दिखाना जरुरी है। वोट मांगने के लिए हिन्दू बनना हिंदू देवी देवताओं की पूजा पाठ करना साथ में ही सनातन धर्म के रीत रिवाज अपनाने का दिखावा करना बहुत ही मायने रखता है। न चाहते हुए भी अगर वोट का लालच है तो लोग हिन्दू धर्म को न मानते हुए भी दिखावा करने के लिए हिन्दू देवी देवताओं के भजन कीर्तन भी करते हैं। लोगों के वोट पाने के लिए हिन्दू धर्म की महान गंगा नदी में डुबकी भी लगानी होती है।

हिन्दू वोट पाने के लिए नेता क्या क्या करते हैं?

      मुस्लिम वोट पाने के लिए हिन्दू होते हुए भी रोजे की पार्टी में जाना जरुरी है, वोट पाने के लिए सर पे टोपी पहनना भी बेहद जरुरी है। मुस्लिम वोट पाने के लिए महिला प्रत्याशी को मुस्लिम महिलाओं के बीच जाकर उनकी पोशाक पहनकर दिखाना पड़ता है। अगर यह सब नहीं करोगे तो आपकी लोकप्रियता में कमी आएगी और आपको वोट बनाना बहुत ही मुश्किल हो जायेगा।  भारत की राजनीत में भारत की विकास दर, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार कहीं बहुत पीछे छूट जाता है। भारतीय राजनीत में शिक्षा से ज्यादा धार्मिक होना पड़ता है।

     भारत के लोगों की मानसिकता को अबसे ही नहीं जबसे संबिधान लागू हुआ उसके 3 से 4 दशक पहले तभी से धार्मिक झुकाव की तरफ मोड़ दिया है। कई लेखों के अनुसार भारत में रहने वाले लोगों को पता ही नहीं था हम हिन्दू हैं। सब प्रेम से रह रहे थे। सायद यही वजह थीं कि भारत के लोगों पर अंग्रेज और मुग़ल शाशक राज करते रहे। फर्क बस थोड़ा सा है तब लोग जल्दी समझ नहीं पाते थे अब जल्दी समझ लेते हैं।

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        मुस्लिम वोट को पाने के लिए मुस्लिम व्यक्ति की गलती पर भी पर्दा डालने के लिए उसे बचाना है समाज से भी कानून से भी। किसी बड़े मामले में अगर एक मुस्लिम व्यक्ति ने क्रूरता की है जिसकी सजा कोर्ट के द्वारा दी गयी है उसमें भी मुस्लिम वोट पाने के लिए दिखावे के आंसू बहाने हैं। आतंकवादी की मृत्यु पर कैंडल मार्च निकालना तो हमारे भारत की परम्परा हो गयी है। जबकि आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता है। उसके दिमाग में सिर्फ इतना बैठा दिया जाता है अगर आप काफिरों को मारते हुए सहीद होते हैं तो 72 हूर मिलेंगी जन्नत में जगह मिलेगी। 

       वही हिन्दुओं ने सुरु कर दिया है अगर किसी हिन्दू ने कोई अपराध किया है तो उसे भी कानून से बचाने के लिए हर प्रयास किया जायेगा। यह सब इसलिए नहीं किया जाता है कि उसे बचाया जा रहा है। इसलिए किया जाता है। इसलिए किया जाता है वोट बैंक को भड़काया कैसे जाये, वोट बैंक बनाया कैसे जाये।

     हिन्दू समाज में जो केटेगरी बनाई गयीं हैं वोट के लिए अपराध के हिसाब से राजनीत करने वाले और मिडिया चिल्लाते हैं। अगर किसी जनरल केटेगरी के व्यक्ति ने दलित हिन्दू पर अत्याचार किया है तो मीडिया और राजनेता दलित वोट बनाने के लिए बहुत चिल्लाते हैं। अगर किसी पिछड़े वर्ग के व्यक्ति ने पिछड़े वर्ग के व्यक्ति पर अत्याचार किया है तो मीडिया और राजनेता न्याय के लिए नहीं चिल्लाते हैं। उदाहरण के तौर पर जनपद मैनपुरी उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के दबंगों ने पिछड़े वर्ग के घर में आग लगाकर  पांच सदस्यों को जिन्दा जला दिया। 

      इतनी बड़ी घटना को लेकर न तो मीडिया के गले के बाहर आवाज आयी न ही किसी नेता ने धरना दिया। वहां पर किसी नेता ने घड़ियाल वाले आंसू इसलिए नहीं बहाये अगर न्याय करेंगे तो वोट भटक जायेगा। यही सब अगर किसी जनरल ने हर्जन व्यक्ति के साथ किया होता तो नेताओं और मीडिआ से गलियां भर जातीं। 

        भारत में न्याय पाने के लिए भी आपके नाम के आगे का टाइटल किस जाति का उल्लेख करता है उस हिसाब से आपकी आवाज को उठाया जायेगा। आप अगर पिछड़े वर्ग की केटेगरी में आते हैं तो चिंता न करें भारत में अगर आपके साथ अन्याय होता है आपकी आवाज उठाने कोई नहीं आएगा। हिन्दू के वोट पाने के लिए क्या क्या नहीं करती है भारत की राजनीत।

        कभी कभार एक सवाल आपके दिमाग में भी उठता होगा हिन्दू धर्म और सनातन धर्म एक ही हैं या अलग अलग हैं। तो आपको बता दूँ कुछ लेख और ग्रंथो के हिसाब से दोनों धर्म एक समान ही हैं और एक ही हैं। देवी देवता समान हैं, भगवान दोनों का एक ही है, धर्मग्रन्थ एक ही हैं कोई भिन्नता नहीं है दौनो एक ही हैं । 

     सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को भी हिन्दू ही कहा गया है। लेकिन कई एक बातों रीति रिवाजों को देखकर लगता है हिन्दू धर्म और सनातन धर्म अलग- अलग हैं। जैसे कि एक छोटा सा उदाहरण ही लेते हैं- हिन्दू धर्म के कई एक धार्मिक स्थल ऐसे हैं जहाँ पर बकरे का खून, मांस भैंसे का खून,मांस या अन्य जीव जन्तु जानवरों का खून और मांस निकालकर देवी देवताओं पर चढ़ाया जाता है जो जीवहत्या को बढ़ावा देते हैं। मांस को खाते तो इंसान ही हैं बस नाम देवी देवताओं का जोड दिया जाता है। सनातन परम्परा के सस्कारों में जीवहत्या पाप है सभी प्राणियों को बराबर जीने का अधिकार है।

          साथ में जैन धर्म, आर्य समाज, बुद्धिस्ट और एक आध धर्मों में हवन पूजा पाठ सभी होते हैं, हवन पूजा पाठ की सामिग्री समान होती है जो कहीं न कहीं सनातन धर्म से मेल खाती है। इसके बाबजूद भी जैन धर्म अपने आपको अच्छा मानता है, आर्य समाज अपने आपको अच्छा मानता है, बुद्ध धर्म अपने आपको अच्छा मानता है। आर्य समाज, सनातन धर्म, हिन्दू धर्म और जैन धर्म में बहुत अधिक समानतायें हैं। बुद्ध धर्म थोड़ा अलग है, हवन और पाखंड जैसी रूचि बुद्ध धर्म में भी भर भर के है। जबकि बुद्ध धर्म को मानने वाले अन्य धर्म को मानने वालों में पाखंड ढूंढ़ते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि मुझमें भी कोई पाखंड देख रहा है। छोडो इस पोस्ट का यह विषय नहीं है दूसरी पोस्ट में इस पर भी विस्तार से लिखेंगे।


         अब फिर से बात करते हैं भारत की राजनीत में धर्म का महत्व। भारतीय जनता पार्टी ने सनातन धर्म के रीत रिवाज अपना कर, हिन्दू धर्मोत्सव में अपनी हिस्सेदारी बनाकर वोट बैंक में कहीं न कहीं मुनाफा जरूर पाया है। साथ में ही भारत की कांग्रेस पार्टी के मुख्य लोग जिन्होंने पार्टी के शुरुआत के दिनों से ही एक बीज बो दिया माँ हिन्दू पिता मुसलमान समझ नहीं आया ये हैं क्या? 

      कई लेखों के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम वोट पाने के लिए धार्मिक और संबिधानिक काम मुस्लिम अल्पसंख्यक के हित में ही किये। कई लेखों के अनुसार कांग्रेस पार्टी के पूर्वज मुस्लिम ही थे हिन्दुओं पर राज करने का मौका लगा तो नकली हिन्दू बन गए। समय बढ़ता गया जब हिन्दू धर्म ( सनातन धर्म ) के मानने वाले लोगों को किसी विपक्ष के माध्यम से कांग्रेस की नीतियाँ हिन्दुओं के विरुद्ध समझ में आने लगीं भले ही झूंट फैलाया गया हो लेकिन एक बात तो सच है झूंठ भी 100% झूंठ नहीं होता है। झूंठ का सच से थोड़ा न थोड़ा कनेक्शन जरूर होता है।


          कांग्रेस पार्टी से जब हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग मुंह मोड़ने लगे तो पार्टी के सभी अध्यक्ष हिन्दू वोट पाने के लिए हिन्दू बनने का नाटक करने लगे। कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता हिन्दू देवी देवताओं को गाली देते हैं सनातन धर्म भी नहीं मानते वहीं पार्टी के कुछ कार्यकर्ता हिन्दू वोट पाने के लिए तिलक लगाए घूम रहे हैं। कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष प्रियंका गाँधी ने हिन्दू वोट पाने के लिए गंगा नदी में डुबकी लगाना सुरु किया है। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी जी ने तिलक और जनेऊ पहनना सुरु किया है। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता यह भी कहते हैं हिन्दू कोई धर्म ही नहीं है राम भगवान ही नहीं है, भगवान कृष्ण के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। एक ही पार्टी के कार्यकर्ता जब दोहरा चरित्र अपना रहे हैं तो ये सब भद्दी मानसिकता के साथ सिर्फ वोट बैंक के लिए है।


          भारत की नयी राजनीतिक पार्टी जो आम आदमी पार्टी जो भारत की विकास दर को बढ़ावा देने के लिए उभर कर आयी। बहुत ही कम समय में अपनी ही पार्टी का मुख्यमंत्री बना ऐसा सायद इतना जल्दी संभव नहीं है। कुछ समय के बाद आम आदमी पार्टी को लोगों की समस्या से गंभीर अपनी समस्या लगने लगी। मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करने के लिए इफ्तार की पार्टी, हज हाउस, आदि धार्मिक कामों में हिस्सेदारी देने लगे। 

       कुछ समय बाद यह चरित्र जब लोगों के सामने संदेशों के माध्यम से लोगों के बीच तक जाने लगा। पार्टी के मुख्यमंत्री की समस्या बढ़ रही ऐसा लगने लगा कि हिन्दू वोट बैंक हमसे भटक जायेगा तो मंदिरों के दर्शन और हनुमान चालीसा का पाठ भी करने लगे। किसी राजनीतिक पार्टी का इस तरह का चरित्र धार्मिक होना साबित नहीं करता है वल्कि वोट बैंक को मजबूत बनाने का एक तरीका है जिसके लिए धार्मिक होने का ढोंग करना होता है।


          बहुजन समाजवादी पार्टी के अधिकतर मुख्य कार्यकर्ता हिन्दू धर्म ( सनातन धर्म ) को ना मानने वाले लोग हैं। समय और वोट बैंक की राजनीत ने उनको भी हिन्दू बनने पर मजबूर कर दिया। बहुजन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बुद्ध धर्म को अधिक मानते हैं या फिर किसी धर्म को नहीं मानते हैं। लेकिन हिन्दू वोट पाने के लिए किसी भी हिन्दू त्यौहार की सुभकामनाएँ देना नहीं भूलते हैं। यह सब धार्मिक होने का प्रमाण नहीं है सब कुछ वोट पाने केलिए किया जाता है। 

        

         साथ में समाजवादी पार्टी भी किसी से कम नहीं है। पहले तो हिन्दुओं के त्योहारों का विरोध किया, बाद में लगा कि हिन्दू वोट हमसे दूर जा रहा है तो बाद में कहीं ये मूर्ती कहीं बो मूर्ती बनवाने लगे। हिन्दू होकर हिन्दू त्योहारों का विरोध मुस्लिम वोट पाने के लिए फिर हिन्दुओं के त्योहारों का समर्थन हिन्दू वोट पाने के लिए। यह चरित्र धार्मिक तो नहीं हो सकता है यह सब नकली धार्मिक बनकर वोट के लिए किया जाता है।

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