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Wednesday, October 20, 2021

धर्म के नाम की हिंसा लोगों के दिमाग़ में कट्टरता ऐसे ही नहीं एक बहुत बड़े सडयंत्र से भरी जा रही है।

   हमारे मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे, चर्च आदि सुख- शान्ति के अनुभव के लिए थे  लोगों के बीच में जहर भी इन्ही की बजह से घुल गया।

       जब हम कोई कहानी, कथा या धर्मग्रन्थ पढ़ते हैं तो सामने यह आता है यह मंदिर, आश्रम, गुरूद्वारे सभी धार्मिक स्थल मानव की आस्था के साथ-साथ जहाँ इंसान अपने आपको शांत महसूस कर सके इसलिए बनाये गये। लेकिन कुछ अराजक तत्वों द्वारा, कुछ बादशाहों की हिंसक प्रवत्ती और धर्मगुरुओं ने मंदिरो आदि धार्मिक स्थलों को लड़ाई का साधन बना दिया।

धार्मिक स्थल 


       धार्मिक नीतियों के एजेंडे ने लोगों को भड़काऊ बना दिया। पुराने समय में कोई भी धार्मिक स्थिती जैसी भी रही हो अबकी धार्मिक स्थिति सिर्फ लोगों को आपस में लड़ाने की तरफ मोड़ रही है। इस बात की शुरुआत तबसे हो गयी थी मंदिर तोड़ो मस्जिद बनाओ मस्जिद तोड़ो मंदिर बनाओ। जिन्होंने मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाने की शुरुआत की उनकी मानसिक स्थिती क्या थी यह तो भली भांति उसी को पता होगा। लेकिन इन नीतियों ने लोगों को कट्टरता की तरफ मोड़ना शुरू कर दिया। मेरे लेख से किसी की आस्था को अगर ठेस पहुँचती है तो हमें क्षमा करें हम किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं न ही मेरा उद्देश्य किसी की आत्मा को ठेस पहुँचाने का है। धर्म के नाम पर समाज को बाँटने वालों के बारे में लिखने की कोसिस कर रहा हूँ। समाज में यही हो रहा है अगर आप भी मेरी तरह से सोचने का थोड़ा सा भी प्रयास करें तो जो हमें समझ में आता है आप भी वहीं पहुँच सकते हैं।


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        जो सच में किसी धर्म से जुड़े हुए हैं जिनके अन्दर किसी धर्म को लेकर कट्टरता नहीं है,उनको संसार में शांति ही चाहिए। उन्हें किसी को जबरन धर्म कबूल करवाने, किसी धर्म की तरफ मोड़ने के लिए उकसाया जाये ऐसी जरुरत नहीं होती है। जबरन या लालच में धर्म परिवर्तन करवाना सुनने वाले लोगों के मस्तिष्क में हिंसक तनाव की ओर ले जाता है। अगर मेरे धर्म को किसी ने स्वीकार किया है तो बहुत अच्छा महसूस होता है, किसी ने अपना धर्म छोड़कर किसी और धर्म को अपना लिया है तो गलत सा महसूस होता है।  कोई भी व्यक्ति किसी को लालच देकर या जबरजस्ती अपने धर्म में लाता है तो उसे लगता है मुझे जन्नत मिलेगी या ईश्वर के चरणों में जगह मिलेगी अन्य भी बहुत से सपने दिखाए जाते हैं। 

     जो लोग नास्तिक होते हैं किसी भी धर्म और ईश्वर में विश्वास नहीं रखते हैं वह अपने समूह में ईश्वर मानने वालों को यह विश्वास दिलाकर सामिल करते हैं कि भगवान जैसा कुछ नहीं है सब पाखंड है। यह सब धार्मिक बनाना नहीं है यह सबकुछ अपने धार्मिक, नास्तिक समूह या संगठन में जनसंख्या की वृद्धि करना है। जिस संगठन का जितना विस्तार होगा वह उतना ही बड़ा होगा। जब किसीको जबरजस्ती या गुमराह करके किसी लालच में फसाकर अपने धर्म में सामिल किया है यह तबतक तो ठीक है जबतक आपके समूह में सामिल होने वाले व्यक्ति को पता नहीं चलता है। जब पता चलता है कि मेरे साथ छल कपट करके धर्म परिवर्तन करवाया गया है तो उसके दिल की स्थिती कैसी होती है, सायद बहुत दुख होता जरूर होगा है। आपके धर्म परिवर्तन करवाने के काम ने किसी की आत्मा को ठेस पहुंचाई है। अगर जन्नत और स्वर्ग जैसा कुछ होता है तो  मुझे तो नहीं लग रहा है आपको जगह मिलेगी।

         बीच रोड पर नमाज पढ़ना, किसी सामाजिक स्थान को टारगेट करके वहाँ नमाज पढ़ना धार्मिक आजादी है। माता रानी का जागरण सुनने के लिए भीड़ जमा हो जाती है शहरों में लोगों के पास जगह के आभाव में जागरण भी रोड पर मनाया जाता है। यह आजादी भारत के प्रत्येक धर्म को है, आप अपने धार्मिक महोत्सव रोड जाम करके मना सकते हैं।


        कभी कभार एक खयाल जरूर आता है सभी धर्मों के अपने धर्म ग्रन्थ, धार्मिक स्थान, पूजा पाठ के अपने अपने तौर तरीके यह सब अडंबर तो नहीं है। साथ में ही पीछे से एक खयाल और जुड़ जाता है कुछ न कुछ तो है धार्मिक होने में जो इतने विशाल मन्दिर, मस्जिद गुरूद्वारे बनाये गये। भगवान जैसा कुछ न कुछ जरूर है जिसे महसूस किया जा सकता है समझा भी जा सकता है इसीलिए लोग एक अदृश्य शक्ति से अपने आपको जोड़कर रखे हैं। धार्मिक स्थान आदि सब उसी शक्ति से जुड़े रहने के लिए थे। लोग अपने आपको सुखद महसूस करने के लिए धर्म कर्म करते हैं, धार्मिक स्थानों पर घूमने जाते हैं वहाँ भजन पूजा पाठ आदि जो भी अपने धर्म के हिसाब से होता है सब कुछ करते हैं। मन्दिर, मस्जिद, गुरूद्वारे आदि सब बनाये ही सायद इसीलिए गये थे।


        वर्तमान समय में धार्मिक होने के साथ-साथ कट्टरता भी लोगों के दिमाग में बढ़ती ही जा रही है। शुरुआत बहुत पहले हुयी थी अब उसका विस्तार बढ़ता ही जा रहा है। अपना धर्म सभी को अच्छा लगता है हमने अपने धर्म में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को मिलाने के लिए उसके निजी धर्म के बारे में भ्रम फैलाया उसे लालच दिया अपने धर्म में सामिल कर लिया। पूरी दुनियां में जहाँ जिस धर्म का बाहुल्य है उन्होंने अल्पसंख्यक लोगों के धार्मिक स्थान तोड़ दिए उनसे जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया, उनकी धार्मिक आजादी छीन ली। 


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        भारत की राम जन्मभूमि जो हिन्दू धर्म की आस्था और पूर्वजों के इतहास से जुडी हुयी थी। इतहास के अनुसार भारत में मुगल साशन आया तो राम मन्दिर ही नहीं कई हिन्दू मन्दिर तोड़कर मस्जिद में बदल दिए गये। हिन्दू मंदिरों को मस्जिद में बदलना ही अशांति की शुरुआत थी। राम जन्म भूमि पर कोई विवाद होता ही नहीं अगर पाकिस्तान आदि इस्लामिक देशों की तरह भारत में भी इस्लामिक शासन बना ही रहता। भारत मुगल सशकों अंग्रेजों से आजाद हुआ तो हिंदुस्तान में हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंची और रामजन्म भूमि बापस पाने व राम मन्दिर बनाने का विवाद शुरू हुआ कई लोग मारे भी गये अंत में अदालत ने राम मन्दिर बनाने का ही फैसला हुआ जो पूरा हो रहा है।

       इजराइल में भी अशांति मस्जिद को लेकर कई बार हुयी पहला अंतिम परिणाम यह आया सैकड़ों निर्दोष लोग भी मारे गये। भारत में भी सैकड़ों मजार और छोटे से मन्दिर जो बीच सड़क, रेलवे स्टेशन, और चौराहों पर बने हुए हैं। यह सब आस्था से ज्यादा धार्मिक मतभेद विवाद आदि को जन्म देते हैं। कई मजारे बीच रोड पर जानबूझकर इसलिए बनायीं जाती हैं अगर कोई भी इसका विरोध करेगा तो एक नये विवाद को जन्म मिलेगा। अगर विरोध नहीं करेगा तो बन तो गयी ही है।

       कई धार्मिक मतभेदों के अनुसार भारत के मंदिरों में जिन लोगों को अछूत माना जाता है उनको अन्दर जाना मना था, अगर धोखे से कोई पहुँच भी जाता है तो उसके साथ पाखंडवाद की वजह से मार पीट की जाती थी जो लोगों की मानसिक स्थिती को बेकाबू करने के लिए बहुत अधिक थी।



       भारत में रहने वाले हिन्दुओं के घर बाहर वाले चबूतरे पर मजारें देखने को मिलती हैं जो मजारें हिन्दुओं के दरवाजे पर बनी हैं उनको किसी ने जबरजस्ती नहीं बनाया है। उन मजार को बनाने वाले खुद उसी परिवार के लोग हैं जिन्होंने वह मजार बनाई है। वह मजार फकीर बाबा, सैयद बाबा, पीर बाबा आदि की होती हैं। जिनके दरवाजे पर बनी हैं वह चादर भी चढ़ाते हैं पूजते भी हैं क्योंकि वह उन्हें अपना ईश्वर मानते हैं।कई मुस्लिम समाज के लोग हिन्दू मंदिरों में अपनी आस्था लेकर जाते हैं। जब यह दृश्य देखते हैं तो अच्छा लगता है। 

          जिन हिन्दुओं ने अपने घर के बाहर मजार बनायी है जो मुस्लिम हिन्दू मंदिरों में जाते हैं देखकर नहीं लगता है हम सब में मतभेद था। मतभेद पैदा किया है तो बेवजह बीच रोड मजार बनाना बीच रोड कोई देवता बैठना। अगर मजार टूटेगी विवाद होगा देवता को हटाया विवाद बनेगा। बहुत सी खबरें आपके पास भी आयी होंगी जिसमें मंदिरों में तोड़ फोड़ मजारों में तोड़ फोड़। यह सब धार्मिक मतभेद मन्दिर तोड़ो मस्जिद बनाओ मस्जिद हटाओ अशांति का प्रतीक होते जा रहे हैं। मंदिरों में मुस्लिम समुदाय के द्वारा तोड़फोड़ मजारों अवैध बनी हुयी मजारों को हिन्दुओं द्वारा हटाना ये सब धार्मिक मतभेद के साथ आपसी मतभेद भी पैदा कर रहे हैं। तोड़ फोड़ इसीलिए ही करवाई जाती है अशांति पैदा हो, जो करते हैं उन्हें उकसाया जाता है शांति भंग की जा सके।

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