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Sunday, September 5, 2021

Van adhiniyam के नाम की धज्जियाँ उड़ रही हैं। पेड़ काटने पर जुर्माना कौन लेगा?

             भारत में पेड़ काटने पर जुर्माना कितना लगता है? पेड़ काटने से नुकसान क्या हैं? एक ग्राम पंचायत में कितने पेड़ होते हैं? पेड़ काटने का कानून क्या है? वन अधिनियम क्या है?

पेड़ काटने पर जुर्माना


      सबसे पहले तो आपको यह समझना होगा कि हमारे भारत में किसी बात का जुर्माना नहीं है जो भी है बो सिर्फ और सिर्फ दिखावा है। हम अक्सर देखते हैं सरकारी कार्यालयों में लिखा होता है यहाँ पर थूकना मना है और साथ में यह भी लिखा होता है पकडे जाने पर 500 रूपये जुर्माना आज्ञा से तहसीलदार। हो सकता है वहाँ के तहसीलदार के मुंह में नहीं तो उनके बगल में बैठे व्यक्ति के मुंह में इतना पान मसाला भरा हो जिससे वह साफ बात भी नहीं कर सकते । जहाँ लिखा होता लोग वहीं पर पान मसाला थूक कर चले जाते है। थूकने और मूतने पर व्यंग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


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Van Adhiniyam वन अधिनियम क्या है? ग्राम पंचायत में पेड़ काटने पर कितना जुर्माना लगता है? 

    वैसे ही पेड़ काटने पर जुर्माना भी है सजा भी है, या फिर पेड़ काटने पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। भारतीय पर्यावरण सुरक्षा के लिए वन कानून 1927 के सेक्सन 68 में आपके खिलाफ पेड़ काटने पर पेड़ों की चोरी, पर्यावरण को नुकसान, प्रदूषण एक्ट के तहत मुकदमा हो जायेगा। लेकिन आज तक मुकदमा किसी को नहीं हुआ है । पेड़ काटने पर मुकदमा हुआ भी है तो किसी बड़े लकड़ी के कारोबारी को। लकड़ी काटने वाले बड़े कारोबारी पर भी मुकदमा तब लगता है जब किसी वन विभाग के अधिकारी से रिस्वत की डील में कमी रह जाती है। 

      ग्राम पंचायत या फिर शहर कस्बे में पेड़ काटने पर जुर्माना है भी तो पेड़ की मोटाई क्या थी,पेड़ किस चीज का था, पेड़ था किस जगह पर, जुर्माने की बात अगर मीडिया को पता चल गयी तो आपके नाम में टाइटल जनरल का जुडा है कि पिछड़े वर्ग का जुडा है, हर्जन का जुडा है, अल्पसंख्यक का जुडा है उस हिसाब से भी जुर्माना हो सकता है। पेड़ काटने का जुर्माना कम भी हो सकता है मामला अगर पुलिस तक ही सीमित होकर निपट रहा है। अगर पेड़ काटते वक्त ही आपको पुलिस ने पकड़ लिया है तो जुर्माना और भी कम हो जायेगा बस डील करने का मौका मिल जाए।

Van Vibhag के कर्मचारी पेड़ कटवाते हैं।

  Van vibhag के कर्मचारी जो जंगल के पेड़ों की सुरक्षा के लिए बैठाये जाते हैं। उनमें कुछ कर्मचारी ही लकड़ी की तस्करी में योगदान देते हैं। कर्मचारियों के द्वारा लकड़ी की तस्करी दो तरह से होती है पहला तो वह अपने निजी फायदे के लिए करते हैं। दूसरा लकड़ी माफिया से जुड़े हुए अन्य राजनितिक दवाव और आधिकारिक दवाव।

    अगर पेड़ काटने की परमिसन सरकार से ले लेते हैं उसके बाद आप पेड़ काट सकते हैं। सरकार की परमिशन लेने के बाद पेड़ काटने पर प्रदूषण से भी खतरा नहीं है, पर्यावरण की सुरक्षा भी खतरे में नहीं आएगी। क्योंकि परमिसन लेने के बाद पेड़ काटने वाली कुल्हाड़ी, आरी जो भी पेड़ काटने के हथियार होते हैं सभी ऑक्सीजन फेंकने लगते हैं। ऑक्सीजन फेंकने के बाद आप एक कितने भी पेड़ काट दें ऑक्सीजन की कमी नहीं पड़ेगी।

    शहरों के मुकाबले गाँव में पेड़ों की संख्या कुछ ज्यादा अधिक नहीं होती है। बस फर्क इतना है शहरों में जहाँ पर बस्ती अधिक होती है वहाँ पेड़ कम होते हैं। बाकी शहरों में सड़क के किनारे या खाली पड़ी जगह में पेड़ होते हैं। ग्राम पंचायत में जहाँ गाँव की बस्ती होती है तो बीच बीच में पेड़ भी लगे होते हैं और बाकी खेत होते हैं फसल के लिए खेतों पर फसल का नुकसान न हो तो पेड़ कम होते हैं। ग्राम पंचायत में पेड़ अधिक होते हैं बो भी जहाँ के किसान बागान की खेती करते हैं। उन गाँव में पेड़ के सिवा कुछ समझ ही नहीं आता है। ऐसे गाँव में कभी जाने का मौका लगता है तो बहुत अच्छा लगता है। एकदम से साफ वातावरण और चारो तरफ हरा भरा दिखाई देता है।


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      ग्राम पंचायत में एक आध पेड़ काटने पर कोई जुर्माना नहीं होता है। शहर या कसबों में हो भी सकता है ग्राम पंचायत में बिल्कुल नहीं। ग्राम पंचायत में कोई अपने पेड़ बेचता भी है खरीदने वाला जब पेड़ काटने आता है जुर्माना न देकर पुलिस थाने में सेटिंग पहले ही कर चुका होता है किसी मुकदमे और जुर्माने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि आपको भी पता होगा अवैध काम सिर्फ सेटिंग से पूरे होते हैं।

      पेड़ काटने से क्या नुकसान हैं?

     पेड़ काटने से नुकसान भी उनका होता है जिनको पर्यावरण की चिंता होती । जिसको पर्यावरण की चिंता ही नहीं है उसका कुछ भी नुकसान नहीं है उसे सिर्फ अपने आपसे मतलब है। हमारे भारत में ऐसे ऐसे मानसिक रोगी हैं जो बेबजह से ही पेड़ काट देते हैं। सरकारी अधिकारी और सरकार चलाने वाले मंत्री जिनको पेड़ लगाने की जिम्मेदारी होती है वह पेड़ लगाने व उनकी देखरेख के लिए बजट का पैसा होता है उसमें घोटाला कर लेते हैं फिर पेड़ कैसे लगाए जायेंगे।

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