00324fc9d7109e097332c96a541277f12be11469 भ्रस्टअधिकारियों की नियत गरीबों के घर तक Drinking Water पहुंचने नहीं दे रही है सरकार करे तो क्या करे। - GOVERNMENT SCHEME SCAM

जिन छोटे मोटे भ्रष्टाचार पर सरकार ध्यान नहीं दें पाती है उन्हें अब हम बताएँगे।

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शुक्रवार, 24 सितंबर 2021

भ्रस्टअधिकारियों की नियत गरीबों के घर तक Drinking Water पहुंचने नहीं दे रही है सरकार करे तो क्या करे।

       हर घर को Drinking Water  पहुँचाने के नाम से फर्जी पानी कनेक्शन से लेकर ठेकेदार ने करोणो रूपये की बचत की। कोई एक ऐसा ही ठेका मुझे दिलवादे।

       सभी सवालों के जबाब भी देंगे लेकिन सबसे पहले समझना है लघु सिंचाई विभाग,ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना,जल निगम के द्वारा आयोजित कार्यकर्म ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को शुद्ध जल पहुँचाने का काम कितनी हकीकत है कितना झूंठ है।

       Drinking Water जिसे हम पीने योग्य पानी कहते हैं वह पानी हर किसी को नसीब नहीं होता है। इस धरती पर कई देश ऐसे हैं जहाँ लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं होता है। सरकार चाहती सभी को शुद्ध पीने का पानी मिले जिससे लोग बीमार न हो। लेकिन भारत का भ्रस्ट प्रशासन लोगों को शुद्ध drinking वाटर पहुंचने नहीं दे रहा है। आज आपको बताएँगे कि भारत में drinking water कैसे बर्वाद किया जा रहा है। उस पीने के पानी की कीमत उन लोगों से पूंछो जिन्हे गंदे नाले का भी पानी नसीब नहीं हो रहा है।

Drinking Water Tank


        हर गाँव में पानी की टंकी होगी या नहीं होगी, हर घर तक Drinking Water कैसे पहुंचेगा ? भारत सरकार का लक्ष्य है 2024 तक हर घर शुद्ध जल पहुंचे। कैसे पहुंचेगा यह तो सन 2024 के बाद ही पता चलेगा। अभी तक  सभी ग्राम पंचायतों में पानी की टंकी नहीं हैं। जिन ग्राम पंचायत में पानी की टंकियां बनी हैं वहाँ हर घर तक शुद्ध जल पहुँच भी रहा है या नहीं पहुँच रहा है। जहाँ पहुँच रहा है किन हालात में पहुँच रहा है इस बात की जानकारी लघु सिंचाई विभाग,ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना,जल निगम की ऑफिसियल वैबसाइट पर भी नहीं मिलेगी और न ही कोई जल मंत्री इस बात को उजागर करने के लिए तैयार होगा। हम आपको लघु सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी हर घर शुद्ध जल पहुँचाने की पोल को उजागर करके बताएँगे।


हर घर को Drinking Water  पहुँचाने का उद्देश्य क्या है?

          लोग नल का पानी पीते हैं जो जमीन से 100 फीट की गहराई से भी कम गहराई से निकाला जाता है। इस वजह से उसमें शुद्धता थोड़ी कम होती है। पानी की टंकी के लिए पानी 300 फीट की गहराई से भी अधिक गहराई से निकाला जाता है जिसकी जांच भी होती है। पानी निकालने की गहराई इतनी बढ़ा दी जाती है जबतक पीने के लायक पानी नहीं मिलता है। शुद्ध पानी पीने से लोग बीमार नहीं होंगे क्योंकि अधिकतम बीमारियां पानी की वजह से होती हैं पानी की टंकी का पानी इसलिए शुद्ध ही होता है। जिस पानी की टंकी की सप्लाई Drinking Water  योग्य बनायी जाती है उसे किसी विसलेरी के पानी से तुलना करने की जरुरत नहीं है। 

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---------------------------------------   पानी की टंकी का पानी विसलरी से अधिक फायदेमंद हो सकता है कमजोर नहीं। लेकिन ग्राम पंचायत में मौजूद पानी की टंकी Drinking Water  इसलिए पीने योग्य नहीं है कि वह अधिक गहराई से निकाला गया है। उस पानी को पीने का मन इसलिए नहीं होता है 1 वर्ष में सिर्फ 2 या तीन बार सप्लाई आने की वजह से पाइप लाइन में भरा हुआ पानी गन्दा हो जाता है टंकी में भी गन्दगी जमा हो जाती है। जब पानी की सप्लाई एक वर्ष में 2 या तीन बार दी जा रही है तो आप कैसे यकीन करोगे टंकी की सफाई समय पर की जाती है। जब कभी पानी की सप्लाई दी जाती है पानी का रंग भी खराब होता है। रंग में साफ होने वाला भी पानी पीने लायक नहीं होता तो आप गंदे रंग का पानी कैसे पी सकते हैं। शुरुआत के 10 मिनट तक तो पानी की टंकी का पानी पीने क्या छूने में भी घिन आती है।


          अभी तक सभी ग्राम पंचायतों में पानी की टंकियां नहीं लगायी गयी हैं। जहाँ पर पानी की टंकी लगी हुयी हैं वहाँ पर Drinking Water  सप्लाई का बहुत ही बुरा हाल है। सायद ही कोई ऐसी ग्राम पंचायत होगी जहाँ पर पानी की टंकी के पानी की सप्लाई समय पर दी जा रही है। अधिकतम ग्राम पंचायतों का हाल यह है एक वर्ष में सिर्फ एक या दो बार ही पानी की सप्लाई दी जाती है बो भी तब जब किसी अधिकारी को याद आ जाता है अगर याद नहीं आया है तो कुछ नहीं होने वाला है।बाकी के समय पानी की सप्लाई बंद ही रहती है। यह काम कोई नया भी नहीं है जबसे पानी की टंकी लगायी गयी हैं तबसे है। ग्राम पंचायतों में पानी की टंकी कहीं 2012 में भी लगी हैं कहीं 2013 में लगायी गयी हैं कहीं 2014 में और उसके बाद भी जरूर लगायी जा रही होंगी।

         जहाँ 2021 में पानी की टंकी लगायी जा रहीं हैं उनसे तो अभी पानी की उम्मीद नहीं की जा सकती है। लेकिन जहाँ सन 2014 में पानी की टंकी का काम शुरू हुआ था और 2015 में पानी की सप्लाई भी शुरू हो गयी थी उस ग्राम पंचायत में जाकर 2021 तक की एक सच्ची रिपोर्ट तैयार की जाए तो गाँव के लोगों को 5% से भी कम शुद्ध पानी की टंकी का पानी नसीब हुआ होगा। क्योंकि पानी की टंकी का संचालन ही ठीक से नहीं हो पाया है। पानी की टंकी पर मोटर रूम, पाइप लाइन का टूटना , बिजली का ट्रांसफार्मर खराब होना , और भी बहुत सी टूट फूट होती रहती हैं। वह खर्चा तो टंकी संचालन के साथ होता ही रहता है जिसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन मजे बात एक और है जो पानी की टंकी बनाई गयी हैं उनके मोटर रूम, स्टॉफ रूम, और बाउंड्री अगर इनकी दीवारें मिट्टी की बना दी जाती तो सायद 10 वर्ष से अधिक समय तक चल जाती। सीमेंट और ईंट की दीवारें 5 वर्ष भी सही सलामत खड़ी नहीं रह सकती हैं। 

        जबसे पानी की टंकी बनायी गयी उसके बाद 7 वर्ष के अंतराल में पाइप लाइन को पुनः ठीक करने का खर्चा 30 लाख से लेकर 70 लाख से अधिक का बजट है। अगर मोटा मोटा ही जोड़ा जाए तो 3 करोड़ रूपये से अधिक एक पानी की टंकी के लिए खर्चा किया जाता है। इतना पैसा एक ग्राम पंचायत में पानी के लिए  होने के बाद भी पानी की टंकी सुचारु रूप से नहीं चल रहीं हैं। कोई न कोई कमी बनी ही रहती है। सरकार का इतना रुपया खर्चा होने के बाद काम ठीक से नहीं होता है। आप सीधे से समझ सकते हैं काम को करने वाले बेईमान हैं साथ में अधिकारी भी बेईमान हैं जिन्हें अपनी आँखों से यह दिखाई नहीं देता है काम कैसे किया जा रहा है।

        एक पानी की टंकी की उम्र 40 वर्ष से अधिक होती है जिसमें से 10 वर्ष तो इस बात में निकल गये अभी तक सप्लाई ठीक नहीं है। बाकी के 20 बर्ष में भी यही होगा  और जब 10 वर्ष बचेंगे उसमें यह होगा टंकी जर्जर हो चुकी है अब सप्लाई के लायक नहीं है। पानी की टंकी के 30 वर्ष के कार्यकाल में घर घर पानी पहुँचाने के और भी खर्चे होंगे। सायद 4 करोड़ रूपये एक ग्राम पंचायत का खर्चा सिर्फ शुद्ध जल पिलाने के लिए  4 करोड़ रुपये होगा फिर भी ग्राम पंचायत के लोगों को शुद्ध जल नहीं मिल पा रहा है। यह इसकी बजह से नहीं है कि गाँव के लोग साफ सुथरा पानी पीना नहीं जानते। यह सब इसकी बजह से है गाँव से ही निकले हुए बेटे जो अधिकारी बने बैठे हैं नेता बने बैठे हैं उनके दिमाग में सिर्फ पैसा कमाना चल  रहा है। जिस दिन दिमाग में यह गुंजने लगेगा ये हमारे लोग हैं इनके लिए कुछ अच्छा कर दिया जाए। सरकार के द्वारा भेजी हुयी हर सुविधा लोगों तक पहुंचने लगेगी।

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         एक ग्राम पंचायत में जितने परिवार रहते हैं उनके शुद्ध जल की चिंता करते हुए लघु सिंचाई विभाग,ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना,जल निगम को पानी की टंकी नहीं बनवानी चाहिए थी। पानी की टंकी की जगह प्रत्येक परिवार के घर वाटर पिओरिपायर दे देने चाहिए थे। जिससे 3 लाभ होते पहला तो पूरी ग्राम पंचायत के लोगों को 80% से 95% तक शुद्ध पीने का पानी पीने के लिए मिलता , दूसरा लाभ 7 वर्ष में इतना खर्चा भी नहीं होता, तीसरा लाभ पानी की टंकी महीने दो चार महीने में एक आध बार चलाई जाती है तो बहुत पानी बर्बाद होता है। अगर रोजाना पानी की टंकी से पानी सप्लाई दिया जाए तो और भी अधिक पानी बर्बाद होगा। 7 वर्ष के अंतराल में एक ग्राम पंचायत के लोगों को शुद्ध पानी पिलाने के लिए सरकारी खजाने से 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रूपये तक पुनः सरकार ने इसलिए खर्चा किया जो पाइप लाइन आदि टूट चुके हैं वो सही किये जा सकें। इतना खर्चा होने के बाद भी 


ये वीडियो ऐसी जगह का है जहाँ 55 लाख रूपये खर्चा किया गया सभी टूट फूट सही की जा सकें। उसके बाद भी पीने का पानी इस तरह से बर्बाद हो रहा है। यह वीडियो यह साबित करता है 55 लाख का बजट टूट फूट ठीक करने का जिसने भी बनाया उसने किसी लालच में अधिक बनाया है। जिसने यह 55 लाख की रकम टूट फूट के लिए पास की है उसने भी किसी लालच में की है। जिसके पास इसको सुधारने का ठेका दिया गया है बहुत अधिक रुपया बचाया है। सरकार जिसे भी ठेका देती है काम करवाने का उससे सरकार को कोई भी मुनाफा है मुझे तो नहीं लग रहा है।


           हम कोई पत्रकार नहीं हैं इसलिए रिपोर्टिंग नहीं कर सकते फिर भी पूरा लेख सच हैं कोई झूंठ नहीं है। हमने जहाँ की तस्वीर और वीडियो दिखाया है सायद अच्छा न हो आपके लिए कोई मायने भी न रखता हो। यह दुर्दशा किसी एक ग्राम पंचायत की नहीं है। हमने भारत के कई हिस्सों में जहाँ भी पहुँच पाया वहाँ की ग्राम पंचायतों में पता किया एक एवरेज लगाया तो अधिकतम पानी की टंकी का यही हाल था। किसी भी ग्राम पंचायत के लोगों को पीने का पानी एक वर्ष में 30 दिन भी पीने को नहीं मिला है। ऐसा नहीं लगता है प्रधानमंत्री जी की हर घर को शुद्ध जल पहुँचाने की योजना खुद में फैल है। यह लघु सिंचाई विभाग की कमी है। सरकार खुद में झूंठ बोल सकती है ये बात नयी नहीं है। लेकिन सरकार ने पैसा लुटाया है किसी काम के लिए यह लघु सिंचाई विभाग,ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना,जल निगम की लूट है। जिन्होंने लूटा है इस बात को वह लोग भली भांति खुद ही जानते होंगे। 

        ग्राम पंचायत में पानी की टंकी समय पर न चलने का एक कारण और भी है। जो व्यक्ति ऑपरेटर का काम कर रहा है उसे लगभग 7 वर्ष की सिर्फ 18 हजार रूपये तनख्वाह दी गयी है। भैया इत्ता सस्ता मजदूर हमारे भारत में कैसे संभव है। जितना सस्ता मजदूर है उसी हिसाब का काम है। जब 50 हजार रूपये से अधिक तनख्वाह लेने वाला अधिकारी हमारे भारत में मन से काम नहीं करता है फिर इतना सस्ता कैसे करेगा ये तो कमाल की बात है। हमारे भारत में जितना भी धन गरीबों के लिए सरकार खर्चा करती है वह ठीक से किया जाए तो सायद बहुत अधिक लोग सक्षम हो जायेंगे। आप लघु सिंचाई विभाग में 50 हजार से अधिक की नौकरी करना चाहोगे या 7 वर्ष में 18 हजार रूपये की निर्णय आपका है बाकी जुगाड़ भी काम करेगी। योग्यता पढ़ाई की जैसी भी हो घोटाला करने के लिए किसी पढ़ाई की जरुरत नहीं होती है वह तो खुद ही हो जाते हैं।


        एक पानी की टंकी को बनवाने की लागत और हर-घर तक पाइप लाइन बिछाने की लागत 7 वर्ष में दोनों मिलाकर ढाई करोड़ रूपये के लगभग लागत होती है।  जब पुनः पानी की टंकी वाली पाइप लाइन को ठीक करने का बजट 70 लाख रुपये था उसके बाद भी पाइप लाइन ठीक नहीं हुयी है। आपको यह सब मजाक लग रहा होगा लेकिन सच्चाई है। अब उस पाइप लाइन एक वर्ष बाद फिर से 70 लाख रुपये का बजट चाहिए होगा तब कहीं पाइप लाइन ठीक होगी या नहीं होगी कोई पता नहीं है। यार इतना रुपया लुटाया जा रहा है साला मुझे कोई 2 रुपये देने वाला नहीं है।

       हर घर Drinking Water इसलिए भी नहीं पहुँच पा रहा है जबसे पानी की टंकियां लगायी गयीं हैं कोई न कोई खराबी बनी ही रहती है। हालांकि खराबी होना तो आम बात है जो भी चीज बनायी गयी है ऐसा नहीं है बो कभी खराब ही नहीं होगी। फिलहाल आज की पोस्ट में इतना ही सरकार हर घर तक शुद्ध जल पहुंचा पा रही है यह 2024 के बाद पता चलेगा। लेकिन जिस ग्राम पंचायत में पीने का पानी को पहुँचाने का साधन कर दिया गया है वहाँ पर लघु सिंचाई विभाग ने फेल किया हुआ है। विभाग के अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं। जितना करना चाहिए उसका 50 % भी करते रहे तब भी लोगों को Drinking Water मिलता रहे। सरकार अगर लघु सिंचाई विभाग,ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना,जल निगम के आलावा किसी अन्य विभाग को यह काम दे देती तब भी सायद यही होता। हमारे भारत में तो सबका बुरा हाल है। यही बात हम लोगों को बाकी देशों से कुछ हटकर बनाती है।


 हर घर को Drinking Water के नाम से पानी उपभोक्ता के साथ धोखा धड़ी की गयी।


        एक नया अपडेट जनवरी 2022 में सामने आया तो दंग रह गया। जिन ग्राम पंचायत में पानी की टंकी लगायी गयी हैं वहां पानी के लिए कनेक्शन भी किये जाते हैं। जिसको पानी की जरुरत है उसने अपने घर कनेक्शन करवा लिया यहाँ तक तो ठीक है। गलत की शुरुआत यहाँ से होती है। अगर किसी घर में 5 सदस्य हैं तो सरकारी डेटा में सभी सदस्यों के नाम पानी का अलग अलग कनेक्शन है जबकि उसके घर में पानी का पाइप एक ही गया है।

पानी के फर्जी कनेक्शन हो गए यह सब कैसे हुआ?

      जिस व्यक्ति के पास यह जिम्मेदारी थी कि जिस ग्राम पंचायत में पानी की टंकी लगी है वहां कनेक्शन करो। पानी के कनेक्शन पहले ही हो चुके हैं तो उसे सरकारी खजाने से पैसे लूटने थे। उसने ऐसी जगह की खोज की जहाँ से पूरी ग्राम पंचायत के लोगों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी मिल सकती है। फोटोकॉपी मिलना संभव भी हो गया ग्राम पंचायत के सरकारी राशन विक्रेता जहाँ ग्राम पंचायत के लोगों के आधार किसी न किसी कारण से रखे होते हैं।


     राशन विक्रेता ने  लगभग 100 रूपये प्रति आधार की फोटोकॉपी के हिसाब से पानी कनेक्शन करने वाले को बेचीं। उसने उन फोटो कॉपी से सभी के पानी कनेक्शन सिर्फ लिखित में कर दिए। उसने अपना भला कर लिया राशन विक्रेता का भला कर लिया बाद बचा पानी का उपभोक्ता जिससे कभी न कभी पानी के खर्चे की बसूली की जाएगी। उसे पता ही नहीं है कि मेरे साथ यह सब बुरा कब हुआ। प्रशासन तो वही मानता है जो उसके कागज पर लिखा है आपके घर एक पाइप से पानी जा रहा है या 5 पाइप से यह नहीं माना जायेगा। कागज के अनुसर आपके घर 5 पाइप से पानी आ रहा है तो सभी का पैसा भरना पड़ेगा।

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