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Tuesday, September 7, 2021

गाय को राष्ट्रीय पशु बनाये जाने की वजह

      गाय को राष्ट्रीय पशु बनाये जाने की वजह चाहे जो हो।  एक जीव की हत्या रोकने की वजह ने गाय को सियासी मुद्दा बना दिया।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए


      संसार में इंसान एक ऐसा प्राणी है जिसे अगर किसी दूसरे जीव जन्तु पक्षी या इंसान  से आपत्ति होती है तो वह इंसान आपत्ति को खतम करने के लिए इंसान को ही खतम कर देता है । अगर किसी जानवर से समस्या है तो वह उस जानवर को ही खतम कर देता है । अगर किसी पेड़ पौधे से समस्या है उस पेड़ को ही खतम कर देता है । यहाँ तक की जिस बात से समस्या है उसे खतम कर दो ताकि दोबारा समस्या उत्पन्न ही न हो । मांस का कारोबार चलाने के लिए जानवर पाले जाते हैं कोई समस्या हुयी सभी को जिन्दा ही दफन कर दिया जाता है यह दृश्य कोरोना के समय खूब वीडियो के जरिये सोशल मीडिया पर चला था। चीन आदि जो भी देश हैं जहाँ के लोग मांस अधिक खाते हैं बीमारी आगे न बढे इसलिए जानवरों को जिन्दा जमीन में गाड़ दिया गया था ।

     भारत में सनातन धर्म की परंपरा मानने वाले लोग हैं। सनातन धर्म की परम्परा सभी जीवों को बराबर जीने की राय दिखाता है। सिर्फ गाय ही नहीं अन्य जीवों को भी जिन्दा रखने और प्यार करने की राह सनातन धर्म परम्परा सिखाती है। भारत में इस्लाम को मानने वाले भी हैं भारत के संबिधान ने सभी धर्मों को बराबरी का हक और अधिकार दिया है आप जिस धर्म के अनुयायी हैं आप अपने धर्म के उत्सव को हरसोउल्लास के साथ मना सकते हैं। सभी धर्मों को सामान अधिकार संबिधान के हिसाब से, सभी जीवों को जीने और सुरक्षा का अधिकार सनातन धर्म की परम्परा के हिसाब से यह दोनों बातें कुछ-कुछ समान सी लगती हैं। गाय राष्ट्रीय पशु हो जाये और न हो जाये इसके बीच में गाय समस्या बनी हुयी है। क्योंकि इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग गाय की हत्या करते हैं उसका मांस खाते हैं जिनमें कुछ हिन्दू भी सामिल हैं। जब गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जायेगा गाय की हत्या पर किसी ने शिकायत कर दी तो गाय की हत्या करने वाला चाहे हिन्दू हो इस्लाम को मानने वाले लोगों को कोर्ट से भी जो भी सजा का प्रावधान होगा उसके हकदार होंगे। सनातन धर्म की परम्परा को मानने वाले लोग गाय ही नहीं अन्य जीवों में भी ईश्वर को देखते हैं तो जिन्दा रखना चाहते हैं। सनातन धर्म की मान्यताओं और ग्रंथों के हिसाब से गाय भगवान श्री कृष्ण का प्रिय जीव था, कोई भगवान के प्रिय पशु को आघात पहुंचाए यह बात सनातन धर्म को मानने वाले लोगों को अच्छी नहीं लगती। इस्लाम धर्म को मानने वाले लोग गाय की हत्या को कुर्बानी मानकर उसका मांस खाते हैं उन्हें कोई यह सब करने से रोकता है तो यह बात इस्लाम धर्म को मानने वाले लोगों को अच्छी नहीं लगती है। एक देश दो तरह की मानसिक्ता हो रही है जिसके बीच में गाय मुद्दा बना हुआ है। दोहरी मानसिक्ता की और भी वजह हैं लेकिन गाय कुछ खास ही होती जा रही है। गाय को बिल्कुल मारकर यह मुद्दे खतम तो नहीं किये जा सकते पर अभी की तरह गाय आवारा रही तो अपने आप ही खतम हो जाएंगी । खुले मैदान में बच्चे को जन्म देगी हो सकता है गाय के बच्चे को कोई जानवर खा जाये या कोई रोग ही लग जाये। इसीतरह धीरे धीरे गाय की जनसंख्या उन खुले हुए जानवर के जितनी हो जाएगी जिन्हें कोई पालता नहीं है।


      ठीक उसके ही उलट समस्या का समाधान भी इंसान ही निकालता है । चलने में तकलीफ न हो सड़कें बना दीं, गाड़ियां बना दीं जहाज बना लिए और आदि आदि जितना हो सकता है । इंसान को कठिन से कठिन काम सरल हो जाये हर बो बात बनाने की कोसिस होने लगी है । तकनीक काम को जितना सरल करने में सक्षम है लोग उतने ही आलसी होते जा रहे हैं और ये आलस किसी दिन ले ना डूबे ये भी कभी कभी सोच लेना चाहिए । खैर छोडो आज के लेख का ये विषय तो नहीं है आज का विषय भारत में गाय समस्या बनी हुयी है उसपर है ।


      गाय एक पालतू जानवर हुआ करता था अब अखवार और न्यूज़ की हेडलाइन के हिसाब से गाय आवारा जानवर है और हो भी गयी । गाय का दूध घी बहुत ही फायदेमंद होता है। गाय आवारा इसलिए नहीं है कि उसने दूध देना बन्द कर दिया है गाय इसलिए आवारा है उसकी कोई कीमत नहीं है । गांव के किसान गाय,भैंस और बकरी पाला करते थे जिनके बछडे बैल बनकर खेती का काम करते थे तकनीक की वजह से बैल से खेती का काम बन्द हो गया बैलो की कोई कीमत नहीं रही । जब बैल की कीमत नहीं रही तो गाय से किसानों ने रुख मोड़ना शुरू कर लिया । अब किसान भैंस पालते हैं। जितने दिन भैंस ने दूध दिया देने के लायक रही दूध खाया पिया उसके बाद किसान ने भैंस को मांस बेचने वाले को बेच दी खरीददार कीमत देकर चले गये किसान को डबल मुनाफा ।

      जो लोग राजनीति में हैं उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने वाली बात को वोट बैंक की राजनीति से देखना शुरू किया है। श्री योगी सरकार ने गाय की हत्या को रोकने के लिए इंतजाम किये हैं जो भी हैं जैसे हैं। वहीं विपक्ष इस गाय को वोट का मुद्दा बनाकर किसानों के नुकसान के बारे में बातें उछालना शुरू किया है। हालांकि कुछ हद तक विपक्ष का भी गायों के द्वारा किसानों का नुकसान सही है। किसान पूरी- पूरी रात चौकीदार बनकर अपनी फसल की रखवाली करता है। किसानों को गाय आवारा न होने के पहले अपने खेतों पर रखवाली करनी पडती थी लेकिन बहुत कम। कुछ ऐसी फसल होती हैं जिनमें तोता, चिड़िया नुकसान करती हैं फिर भी वह सिर्फ दिन में रखवाली करनी होती थी रात को सभी पक्षी सो जाते हैं। कुछ फसल ऐसी भी होती हैं जिनको रात में जंगली सूअर खा जाता है। जंगली सूअर से जिन फसल का नुकसान है वह फसल भी कम हैं जैसे आलू, गाजर,सकरकंद। इन फसालों की रखवाली सिर्फ उसी किसान को करनी होती थी जिन्होंने बोयी है। जंगली सूअर भी हर क्षेत्र में नहीं हैं जहाँ हैं सिर्फ वहीं रखवाली करनी होती है। लेकिन गाय से प्रत्येक फसल का नुकसान है, गेहूं की फसल को खा लेती है आलू की फसल को कुचल देती है । गाय का फसल चरने का कोई टाइम नहीं है दिन में भी आ सकती है रात को भी।

     गौरक्षा के लिए ट्रस्ट भी हैं भारत में अन्य देशों में भी हो सकते हैं जिसकी जानकारी मुझे नहीं है। साथ ही सरकार ने गौरक्षा के लिए बजट भी बनाने शुरू कर किये हैं। बजट में जगह-जगह गौशाला खोलने हैं, वहाँ पर जितनी भी गाय होंगी उनकी देखरेख के लिए व्यक्ति भी चाहिए, जो भी चारे दलिया का बजट है गायों के लिए बो सब मिलेगा। साथ ही बीमार होने की स्थिती में सभी गायों के इलाज का भी बजट है। यह सब इसलिए किया गया है गाय आवारा न रहे। ये सभी बातें कितनी सच हैं यह सब हम इसलिए नहीं बता सकते जितना भी बजट है उसपर सरकार झूंठ बोल रही है, यदि सरकार अपनी जगह पर सही है तो सरकार के बाद वाले लोगो ने बजट का पैसा हजम कर लिया है। यह सब हम इसलिए लिख रहे हैं गौशाला की जमीनी हकीकत यह है जहाँ भी गौशाला बनाये गये हैं गायों की देखरेख के लिए उनमें से अधिकतम की दुर्दशा है।


      गाय की गौशालाओं में दुर्दशा की एक वजह यह भी है। गौशाला के लिए जो भी बजट दिया गया है वह पैसा घोटाले में वही लोग हजम करने में लगे हैं जिनके हाँथो पैसा गौशाला के लिए आ रहा है।


       सनातन धर्म के हिसाब से जीवहत्या पाप है सभी पर  दया करनी चाहिए चाहे गाय हो या भैंस । भारत में किसी भी प्रकार का जीव जन्तु का मांस नहीं बनेगा इस तरह का निर्णय लेना  तो किसी सरकार के बस में नहीं है फिर भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ ने एक फैसला लिया कि गाय हत्या बन्द । इतना कहते ही बिपक्ष के पिछवाड़े और मुस्लिम समाज के पिछवाड़े में ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने पेट्रोल और लाल मिर्च डालकर आग लगा दी हो।काफी तिलमिलाहट देखने को मिली । पत्रकार श्री रवीश कुमार ने भी बहुत ज्ञान पेला । लोगों ने धमकी भी दी में गाय का मांस खाता हूँ कोई क्या उखाड़ लेगा । हम लोगों को ये सिखाया गया जैसा अपना दर्द होता है वैसा ही दूसरे का तो इस वजह से सबमें भगवान देखने लगे । किसी भी जीव आदि को कभी चोट पहुँचाने से भी डर लगता है । किसी को दूसरे के दर्द से कोई हमदर्दी नहीं काटना है तो काटना है उनको तो तब दर्द होता है जब खुद का ही कोई मारा जाता है ।


     गाय हत्या पर रोक तो लग गयी गाय की कीमत खतम हो गयी तो किसानों ने जबतक गाय दूध देती है तबतक अपने पास रखी दूध देना बन्द खूंटे से छोड़कर खदेड दी । पुनः फिर दूध देने लायक होगी पकड़ ली जायेगी। ऐसा एक किसान नहीं करता है ज्यादातर गाय पालने वाले करते हैं और जब वह एक दूसरे के खेत में जाती हैं दोस होता है योगी ने गाय छुड़वा दीं । पहले तो जो गाय काटता था वही हत्यारा हुआ करता था अब किसान भी हत्यारे जैसा ब्यवहार करने लगा है । अपनी फसल को बर्बाद होता देख गायों पर लाठी पत्थर गुस्से में चला देता है ।


      योगी जी ने गाय को ब्यवस्थित करने के लिए इंतजाम तो किये पर भारत जैसे देश में मुर्दे के लिए घोटाले हो जाते हैं फिर गाय तो जिन्दा है । जितने इंतजाम किये गये सभी फिलहाल तो नाकाम हैं आगे होगा बो देखा जायेगा ।

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