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Saturday, July 10, 2021

भारत में अधिकतम चुनाव आयोग के हिसाब से नहीं गुंडई और पैसे से जीते जा रहे हैं।

   चुनाव आयोग की गाइडलाइन एक तरफ, भारतीय नेताओं की गुंडागर्दी तो ख़तम होने की नहीं।

भारतीय निर्वाचन आयोग ( Election Commission of india )
भारतीय निर्वाचन आयोग ( Election Commission of india )


       भारत निर्वाचन आयोग-भारतीय निर्वाचन आयोग ( Election Commission of india ) का गठन स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से प्रतिनिधि चुनने के लिए किया गया था । 25 जनवरी 1950 को चुनाव आयोग की स्थापना हुयी ।  इस स्थापना और नियम के बारे में ज्यादा जानने की आवश्यकता हो तो विकिपीडिया पर जाकर देख लें । हमने भारतीय चुनाव आयोग का गठन कब हुआ इसके कार्य क्या हैं इसके बारे में संक्षेप में इसलिए लिखा सायद आपको जानकारी न हो चुनाव आयोग का कार्य क्या है? भारतीय चुनाव आयोग ( Election Commission of India ) के नियम के बाबजूद भी निष्पक्ष प्रतिनिधि चुनना बहुत ही कठिन है । 

         संबिधान होने के बाद भी निष्पक्ष प्रतिनिधि जनता के द्वारा नहीं चुन पा रहे हैं । सायद आपके मन को यह विषय गंभीर न लगे मुझे भी नहीं लग रहा है । बस अपना अपना सोचने का नज़रिया है । हम अपने नजरिये को ही गलत ठहरा लेते हैं ।  क्योंकि अपने हिसाब से सबके सोचने का नजरिया अच्छा ही होता है उसका परिणाम क्या होता है ये बाद में पता चल पाता है । जबतक परिणाम पता चलता है तबतक नजरिया बहुत पीछे छूट चुका होता है । देश के प्रधानमंत्री के सोचने का अपना तरीका है । विपक्ष के हमलावर होने का अपना तरीका है । हम अपने चैनल के वीडियो में पत्रकार रवीश कुमार की आलोचना करते हैं अन्य पत्रकारों को भी लपेट लेते हैं । इसका मतलब ये नहीं है कि में रवीश कुमार या अन्य पत्रकारों के विरोध में हूँ । रवीश कुमार की पत्रकारिता को सुनने का मेरा अपना तरीका है जिसे बदला भी जा सकता है लेकिन अभी नहीं ।

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             हम अपने लेख में पत्रकार की आलोचना करते हैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रमोदी की भी आलोचना कर देते हैं । इसका मतलब ये नहीं कि हम विरोधी हैं । विरोधी और आलोचक में फर्क होता है । विरोधी बो होता है किसी की सही नीत का भी विरोध करता है । आलोचक विरोध नहीं करता है । वह अपनी भाषा में जिसकी आलोचना कर रहा है उसकी आलोचना करके और भी बेहतर देखना चाहता है । जो भी कमियां छोड़ रहे हैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रमोदी वह कमी न छोड़ें ।

        भारतीय चुनाव प्रणाली में विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव तो ऐसे बचे हैं जिसमें जनता अपना प्रतिनिधि चुन लेती है । लेकिन उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव या किसी प्रदेश का पंचायत चुनाव में जनता अपना प्रतिनिधि ग्राम प्रधान, बी. डी. सी. और जिला पंचायत सदस्य चुन लेती है । जिसमें से ग्राम प्रधान किसी के साथ धोखा नहीं करता है । बचे हुए जिला पंचायत सदस्य जिन्हें जनता चुनती है बी. डी. सी. प्रत्यासी जिन्हें जनता चुनती है ये जनता के धोखा करते हैं । क्योंकि जितने भी जिला पंचायत सदस्य हैं बो सभी मिलकर जिला अध्यक्ष चुनते हैं ।

     बी. डी. सी. प्रत्याशी हैं बो मिलकर ब्लॉक प्रमुख चुनते हैं । पर गुंडागर्दी और पैसे के खेल में पैसा गुंडागर्दी जिस सदस्य को अपनी और खींच लेती है वही ब्लॉक प्रमुख बनता है वही जिला अध्यक्ष बनता है । जनता भले ही उसे न चाहती हो । भारत निर्वाचन आयोग-भारतीय चुनाव आयोग ( Election Commission of india )  जब इतने प्रतिनिधि चुनने का मौका जनता को देती है फिर ये दो ब्लॉक प्रमुख और जिला अध्यक्ष के पद चुनने का मौका जनता को ही क्यों न दिया जाए । इससे होगा ये राजनीतिक दलों में जो गुंडागर्दी की भावनाएं पनप रही हैं ये भी स्थिर हो जाएगी ।

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में पैसे का खेल । पढ़ने के लिए क्लिक करें ।

           भारतीय संबिधान ने सबसे बड़ी ताकत हमको यह दी है हम अपनी आवाज उठा सकते हैं । इस ताकत को भी दबा दिया जाता है जिसकी लाठी उसकी भैंस । उत्तर प्रदेश चुनाव आज श्री योगी आदित्यनाथ के शाषन में हो रहे हैं पहले समाजवादी पार्टी के साशन काल में भी हुए हैं । बहुजन समाजवादी पार्टी के साशन काल में भी हुए हैं । पूर्णतः भारत निर्वाचन आयोग-भारतीय चुनाव आयोग ( Election Commission of India ) के हिसाब से कब हुए ये कहने के लायक नहीं है । आज उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव हो रहे हैं जिसमें भारतीय जनता पार्टी की गुंडागर्दी पर सवाल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता उठायें तो यह सरासर गलत है । 

      उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में गुंडागर्दी की नींव समाजवादी पार्टी ने ही डाली है । यह आपको अजीब लगा हो लेकिन एक सच्चा उदाहरण देता हूँ । आपको उसमें जरा भी झूंठ जैसा कुछ लगे तो कभी ब्लॉक अछल्दा जिला औरैया उत्तर प्रदेश 206241 क्षेत्र में आकर किसी भी आम आदमी से पूँछ लें 2012-13 में किसके द्वारा गुंडागर्दी से किससे ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्ज़ा किया गया था? कोई भी आपको फटाफट बता देगा। लेकिन इस लेख में तो में ही आपको बताता हूँ ।


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          सन 2010-11 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में ब्लॉक प्रमुख बनने के लिए एक बहुजन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ने पर्चा भरा । उस समय उत्तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी की सरकार थी। ग्राम पंचायत वार्ड से जो भी जनता के द्वारा चुनें हुए बी. डी. सी. प्रत्याशी थे । उन्होंने ब्लॉक प्रमुख पद के लिए उम्मीदवार प्रत्याशी से किसी ने एक लाख किसी ने 2 लाख रूपये लेकर वोट दिया था । आज 2021 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में तो एक बी. डी. सी. प्रत्याशी की कीमत 5 लाख रूपये से ऊपर है । 

    ब्लॉक प्रमुख पद का उम्मीदवार लगभग 60 वोट पाने के करोणो रूपये खर्च करके चुनाव जीत गया । उसके कार्यकाल को मात्र दो वर्ष कुछ माह हुए थे । जब 2012 में उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव हुआ समाजवादी पार्टी की सरकार बनी । सरकार बनते ही बहुजन समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता से गुंडागर्दी की दम पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता ने ब्लाक प्रमुख का पद छीन लिया । ये समाजवादी पार्टी की गुंडागर्दी वाली राजनीति थी । अबकी 2021 के पंचायत चुनाव में वही हाल भारतीय जनता पार्टी कर रही है तो मान्यनीय पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी को यह बात खराब नहीं लगनी चाहिए शुरुआत वही से हुयी थी ।

             इस तरह की हलचल से आपको नहीं लगता है भारत निर्वाचन आयोग- भारतीय चुनाव आयोग ( Election Commission of india ) गहरी नींद में सो रहा है । जिस देश में संबिधान हो और संबिधान की थोड़ी बहुत ही चलती हो आने वाले समय में बो भी बंद हो जाये कौन जान सकता है । या आगे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव में यही होगा जिसकी सरकार उसके ब्लॉक प्रमुख, उसी के जिला अध्यक्ष । कुछ दिन बाद ये नौबत न आ जाये विधानसभा चुनाव में जिस पार्टी की भी सरकार बनेगी  बो उसी दिन अपने ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य, और जिला अध्यक्ष गुंडागर्दी से घोषित कर दिया करेगी । क्योंकि उनको पहले से पता रहेगा सरकार हमारी है तो मेरे उम्मीदवार ही जीतेंगे ।भारतीय चुनाव आयोग ( Election Commission of india )  का खामखां खर्चा और समय नस्ट हो रहा है ।

           आपके मोबाइल पर भी हजारों खबरें आयीं होंगी जिनकी हेडलाइन में साफ-साफ लिखा होगा ब्लाक प्रमुख के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की गुंडागर्दी । आपके मोबाइल पर कई वीडियो ऐसे भी आये होंगे जिनमें एक पीड़ित व्यक्ति चिल्ला कर कह रहा होगा मुझे भारतीय जनता पार्टी के गुंडों द्वारा पर्चा न भरने के लिए पीटा गया । इन सभी वीडियो और खबरों को पूरी गंभीरता से न लें कुछ खबरें और वीडियो प्रायोजित ढंग से भी बनाये गये हैं। ज्यादातर ख़बरें और वीडियो सच भी हैं । एक नयी फ़िल्म का डायलॉग तो याद होगा सभी को अगर सुना हो । नहीं सुना है तो में बता दूँ "अगर कुत्ते को मरना हो तो ये अफवाह फैला दो कि वो पागल है " । ऐसा ही हाल राजनीत का है पता नहीं किस हद तक गिरकर क्या नाच कर दें।

 ब्लॉक प्रमुख कैसे बनते हैं? यहाँ पर क्लिक करकेपढ़ें.

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