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Wednesday, July 7, 2021

भारत में हो रही है Water Shortage गर्मी आते ही नेताओं और न्यूज़ चैनल की Save Water नौटंकी सुरु। Water Crisis , Water Shortage , Water Reserves, Save Water

        मई जून की गर्मी आते ही Save Water  की नौटंकी सरकार से लेकर अखवार तक सुरु कर देते हैं। Water Shortage  in India ! जल बचाता कोई नहीं!

 भारत में पानी की कमी क्यों हो रही है?पानी की तलाश कब होती है?भारत में कितना पानी बर्बाद होता है?पानी के लिए क्या क्या करना पड़ता है?

तलाश तालाबों की, तलाश पानी की।
 Save Water तलाश तालाबों की, तलाश पानी की।

        देश में Water Shortage  है यह खबर सिर्फ सरकार और प्रशासन को ही नहीं आम लोगों को भी है । मार्च के महीने से लेकर जुलाई तक तो अखवार के हर पन्ने पर पानी का संकट गहराया रहता है । प्रत्येक न्यूज़ चैनल को भी पानी की कमी रहती है आप टीवी खोलिये शाम तक प्रत्येक चैनल दो बार पानी से परेशान जरूर होता है । सरकारें भी मार्च के महीने से चिंतित होना शुरू होतीं हैं जून जुलाई से बारिश की एक आध बूँद गिरते ही चिंता मुक्त हो जातीं हैं । प्रशासन में मौजूद डी. एम. साहब एस. डी. एम. साहब आदि आला अधिकारी भी अखवार के किसी कोने में जल बचाने के निर्देश झाड़ते हुए नजर आ जाते हैं । जुलाई से ही अगली मार्च तक सबकी Save Water चिंता खतम हो जाती है । भारत में मौजूद सिस्टम को ऑपरेट करने वालों की चिंता सच्ची है या झूठी है आप इसका अंदाजा खुद लगा सकते हैं ।

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मिशन जल सक्ति क्या है?

      मिशन जल शक्ति ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध जल पहुंचे। सरकार ने हर घर को शुद्ध जल पहुँचाने का संकल्प और बजट दोनों बनाये हैं। लोग सबसे अधिक बीमार खराब जल की बजह से होते हैं। इसलिए सरकार का प्रयास रहता है हर घर हर व्यक्ति तक शुद्ध जल पहुंचे। लेकिन भ्रष्टाचार पहुंचने नहीं दे रहा है। पानी की टंकी वर्षों से खराब पड़ी हैं और वर्षों खराब रहती हैं कोई सुनवाई और कार्यवाही नहीं होती है। मिशन जलशक्ति में भ्रस्टाचार कैसे हो रहा है पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें।

   जल से ही जीवन है। क्या देश में Water Shortage है? पानी की सप्लाई कहाँ होती है?

      Save Water के कोई भी कथित प्रयास नहीं होते हैं यह सब आपने भी देखा होगा। पानी तो हर साल अखवारों और न्यूज़ चैनल की हेडलाइन ही बनकर रह जाता है। अधिकारियों के दिशा निर्देश भी ऑफिस के किसी कोने में टंगे हुए धूल चाट रहे होते हैं। हकीकत में जहाँ पानी बर्बाद हो रहा है तो होने दो किसी को चिंता करने की क्या जरुरत है।


     सासन प्रशासन की Save Water चिंता जुलाई के बाद मार्च तक जारी रहा करे तो सायद Water Crisis कम न हो । पानी का संकट अखवार, सरकार, और प्रशासन के बाद लोगों में भी उतनी देर ही रहता है जितनी देर जरुरत के लिए जल्दी पानी नहीं मिलता है । पानी मिलने के बाद आम लोगों की चिंता भी खतम हो जाती है । मुझे तो यही लगता है सभी की चिंतायें वास्तविक नहीं दिखावा है ।

 

        भारत के ग्रामीण क्षेत्रों का यह हाल है इंडिया मार्का हैड पम्प पानी 100 फीट की गहराई पर छोड़ जाते हैं । कुए तो 15 वर्ष पहले ही सूख चुके हैं नल के पानी भी सायद जल्दी सूख जायेंगे । जमीन के अंदर जो पानी का भंडार सूखता चला जा रहा है इसके दो मुख्य कारण हैं । पहला कारण तो यह है बारिश की कमी और दूसरा खेतों की सिचाई के लिए जमीन के अंदर के पानी का प्रयोग । खेतों की सिचाई से सायद 30% पानी ही बर्बाद जाता है बाकी पुनः जमीन के अंदर चला जाता है । खेतों के अगर नदियों का भी पानी प्रयोग होने लगे तो पानी की समस्या जल्दी न आये जितनी जल्दी का अनुमान लगाया जा रहा है । सन 2001 में हम बहुत छोटे थे हिंदी पढ़ना थोड़ा थोड़ा सीख रहे थे। अखवार का नाम तो याद नहीं है लेकिन उसमें 2011 तक पानी बिल्कुल खतम था। उसके बाद 2010 में दैनिक जागरण अखवार ने 2020 तक पानी खतम हो जायेगा लिखा था ।

        सरकार की पानी के लिए चिंतायें जुलाई से खतम इसलिए भी होने लगती हैं । न्यूज़ चैनल का स्टूडियो भारी बारिस की वजह से बहने लगता है । हमने 2011 से टीवी पर न्यूज़ देखना आरम्भ किया है जिसमें प्रत्येक वर्ष बारिस का रिकॉर्ड 130 साल के लगभग टूट जाता है और अभी 2021 तक भी बारिश का 130 वर्ष के आसपास ही टूट रहा है । न्यूज़ चैनल अखवार और सरकार के पास चर्चा में रहने के जब कोई विषय नहीं होता है तो Water Crisis पर ही बैठकर गंभीर हो लेते हैं ।

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         पानी बचाने के लिए सरकार ने कई योजनाएं सुनाई लेकिन जमीनी हकीकत में काम अभी तक शुरू नहीं है । सायद कभी होगा भी नहीं, पानी बचाने के उपाय पर काम तब होगा जब पानी सरकार के कार्यालय न्यूज़ चैनल के स्टूडियो और प्रशासन के दफ्तर में किल्लत होने लगेगी ।

 

             ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत योजना में Save Water का विषय भी अभी तक गंभीर नहीं है । प्रत्येक ग्राम पंचायत के प्रत्येक मजरे और ग्राम पंचायत में एक तालाब की ब्यवस्था होना अनिवार्य है लेकिन तालाब खोदने का बजट पास होता है । ग्राम पंचायत में तालाब खोदने के लिए बजट ब्लाक में बनाया जाता है जिसे ग्राम विकास अधिकारी तैयार करता है । एक तालाब को खोदने की लागत अगर 10 लाख है तो बजट 15 लाख का बनाया है । 15 लाख रूपये से तालाब की खुदाई होती है लेकिन खर्चा 3 लाख ही हो पाता है बाकी के 12 लाख रूपये मिल बाँट कर हजम कर लिए जाते हैं । कभी कभी तालाब सिर्फ लेखा जोखा में होता है तालाब खोदा ही नहीं गया है ।

 

         इस पानी के संकट वाले लेख से परेशान होने की जरुरत नहीं है । हम भी सीरियस नहीं हो रहे हैं । अरे भाई जब Save Water ke naam par सरकार गंभीर नहीं है तो हम क्यों हो जाएँ । पढ़ें और इंजॉय करें ।

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