On this website, along with entertainment, you will get news of health, technology, and country and abroad. News posts are available in Hindi and English on our website.

Translate

Breaking

Monday, June 28, 2021

भारत में होने वाले चुनावों में शराब न बाटी जाये तो पता ही नहीं चलता है कि चुनाव हैं।

          भारतीय चुनाव आयोग तो नहीं चाहता है कोई प्रत्याशी लोगों को शराब बाँटे, लेकिन वोटर शिक्षा के आभाव में खुद प्रत्यशी से शराब मांगता है।

 भारत में वोट कौन डाल सकता है? वोट के लिए शराब क्यों पिलाई जाती है? वोटर कितने प्रकार के होते हैं? वोट के लिए पैसे बाँटना गलत है या सही? शराबी वोटर से देश के क्या नुकसान हैं? पैसे से खरीदे वोट क्या नुकसान करते हैं?

भारतीय चुनाव प्रणाली में धन और शराब
भारतीय चुनाव प्रणाली में धन और शराब

    भारतीय चुनाव प्रणाली में चुनाव के समय वोटर का वोट पाने के लिए उम्मीदवार प्रत्याशी हर हथकंडे का प्रयोग करता है जिसका प्रभाव अच्छा तो हो ही नहीं सकता, अच्छा कहने के लायक भी नहीं है हम दुष्प्रभाव कह सकते हैं आज के लेख में इसी के बारे में सोचते हैं झूठे वादों के बाद धन और शराब का वितरण अहम भूमिका रखता है   भारतीय चुनाव प्रणाली में वोटर किसे वोट देगा वह वोट देने का निश्चय किस हिसाब से करता है इसे तीन भागों में हम ही बाँट देते हैं भारतीय चुनाव प्रणाली में धन और शराब का लोगों की आर्थिक और मानसिक दोनों संतुलन पर प्रभाव डालता है इसे बाद में समझेंगे पहले वोटर के प्रकार को समझते हैं

 

वोटर के प्रकार - प्रायः वोटर कई प्रकार के हो सकते हैं लेकिन हम वोटर के कुछ सरल तीन प्रकार ही समझते हैं

            ( 1 )-समझदार वोटर - 

भारतीय चुनाव प्रणाली में समझदार वोटर की कमी है जिसका कारण शिक्षा और बेरोजगारी है। इस वजह से समझदार वोटर बहुत ही कम हैं शिक्षित लोग हमेशा हर चुनाव में अपना वोट बदल देता आज के चुनाव में उसे समझ में रहा है ये उम्मीदवार या ये पार्टी देश के लिए अच्छी नीत पर काम कर रही है या करेगी वह अपना वोट उसी को दे देता है

     लेकिन एक कमी शिक्षित वोटर की भी है वो ज्यादातर किसी लालच में फसकर किसी पार्टी की चाटुकारिता करने लगता है वह कभी कभी सरकार के गलत रवैया को खुद नहीं समझ पाता है क्या सही हो रहा है क्या गलत हो रहा है यह जानते हुए भी वोटर को अपनी चमचागिरी से अपनी और खींचता है उसे किसी की परवाह करते हुए अपने निजी स्वार्थ से मतलब है खुद जैसा भी उल्टा सीधा समझता है वैसा ही अपने आस पास मौजूद लोगों को समझाता है ।जिससे निम्न स्तर के दवे हुए लोग समझ नहीं पाते हैं हम किसे चुनें जो मेरे लिए बेहतर है


अन्य संबंधित पोस्ट पढ़ने के लिए  नीचे दी गयी पोस्ट की लिंक पर क्लिक करें।

भारत की राजनीत में चुनावी हिन्दू बनना बेहद जरुरी है क्याक्लिक करके पढ़ें।

भर्स्ट अधिकारियों की नियत गरीबों के घर तक शुद्ध जल पहुंचने नहीं दे रही Click To Read

ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री आवास अपात्रों को रिश्वत के जरिये बनवा दिए। Clik To Read

मनरेगा से रोजगार सेवक ने फर्जी ड्यूटी से लाखों की फर्जी की कमाई।Clik To Read 


           ( 2 )-शराबी वोटर - अगर किसी व्यंगात्मक तरीके से समझा जाये या आलोचनात्मक तरीके से समझा जाये भारतीय चुनाव प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण योगदान अभी भी शराबी वोटर का ही है जिसे सिर्फ अपने नशे से मतलब है उस शराबी वोटर का कोई ठिकाना भी है किसे वोट देगा उसे नशे की लत की वजह से अच्छा बुरा समझ ही नहीं आता है बस वोट देने से मतलब, किसे देना है किसे नहीं देना है वह बहुत ही अल्प समय में तय कर लेता है   आज अभी वह किसकी शराब पीकर आया है जबतक नशा रहता है उसी के गुणगान करता है थोड़ी देर बाद किसी दूसरे प्रत्याशी ने शराब पिला दी तो उसके गुणगान करेगा हो सकता है जिसने उसे पहले शराब पिलाई थी उसे गलियां भी देने लगे उसका एक खुद का निजी रुटीन होता है जो भी उसे ज्यादा और अच्छी शराब पिला देगा उसी को वोट देगा

 

        भारतीय चुनाव प्रणाली में हालांकि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में शराब लोगों तक कम पहुँच पाती है जिस पैसे से लोगों को शराब बाँटनी होती है उस पैसे से पार्टी के कार्यकर्ता अपना भला कर लेते हैं सबसे अधिक शराब का वितरण भारतीय चुनाव प्रणाली के पंचायत चुनाव में होती है क्योंकि पंचायत चुनाव में सभी उम्मीदवार प्रत्याशी आसपास के होने के साथ-साथ संख्या में भी अधिक होते हैं एक-एक ग्राम पंचायत से 20 से अधिक उम्मीदवार खड़े होते हैं वो सभी शराबी वोटर को रोजाना एक - एक देशी शराब की सबसे छोटी बोतल देंगे तो वोटर के पास 20 बोतल हो जातीं हैं अब आप ही समझिये वह वोटर 24 घंटे में कितनी पी सकता है और साथ ही दूसरे दिन फिर से एक - एक बोतल फिर से मिलना है पंचायत चुनाव के जबतक वोट नहीं पड़ जाते एक माह तक के लगभग यही हाल रहता है और यह कोई काल्पनिक लेख नहीं है बिल्कुल सच्चाई है

 

       ( 3 )- लालची वोटर - 

    भारतीय चुनाव प्रणाली में लालची वोटर फ्री की घोषणा सुनकर वोट देता है उसे देश की आर्थिक स्थिती से लेना देना नहीं है सरकार फ्री की यजनाओं का बजट कहाँ से लाएगी उससे भी मतलब नहीं होता है उसे फ्री बिजली पानी घर सफर और दोनों समय का भोजन सब फ्री चाहिए जिसका परिणाम ये होता है सरकार तो गर्त में नहीं जाती है लेकिन खुद गर्त में चले जाते हैं काम करने में आलस आता है, हर चीज को फ्री मिलने की आस रहती है भिखारियों की तरह अगर सरकार से लेना ही है तो सिर्फ बेहतरीन इलाज और शिक्षा फ्री लो अगर आप शिक्षित हैं तो फ्री लेने की आदत खतम हो जाएगी

       एक समस्या लालची वोटर की भी होती है लालची वोटर शिक्षित भी होता है और अशिक्षित भी मित्रो लालच मुझे भी जाता है, और लालच किसी को भी सकता है लेकिन लालच करते समय यह भूल जाते हैं थोड़े समय का लालच मेरा नुकसान क्या - क्या करेगा?

 

       अब बात करते हैं भारतीय चुनाव प्रणाली में शराब और धन वितरण से लोगों की निजी जिंदगी पर क्या प्रभाव पड़ता है   एक उदाहरण के लिए हम अपने लेख में पंचयात चुनाव ही समझते हैं पंचायत चुनाव में उम्मीदवार प्रत्याशी कितना खर्चा करते हैं इस बारे में एक लेख लिखा था हमने अगर पढ़ना चाहते हैं तो इस लिंक को खोलें

 

        भारतीय चुनाव प्रणाली में धन और शराब सायद कोई नया विषय नहीं है मुझे तो लगता है जबसे पंचवर्षी योजना का सुभारम्भ हुआ है तबसे ही हो रहा है चुनाव आयोग और प्रशासन कितनी भी कोशिश करे कि चुनाव के समय में शराब का वितरण हो फिर भी शराब और धन लोगों तक वोट के लिए पहुंचा ही दिया जाता है इस शराब और धन की विशेषता भी है, यह बिना किसी वेरिफिकेशन के वोटर तक पहुँच जाती है कास इतनी ही आसानी से लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी पहुँच जाया करे तो सायद भारत एक अच्छा भारत बन जाये  

        इस शराब और धन में एक विशेषता ये भी है जरुरत वाले इंसान की पहचान तुरंत हो जाती है कि इसे शराब की जरुरत है एक गरीब है जिसे राशन कार्ड की आवश्यकता है, विधवा या वृद्धा पेंशन की आवश्यता है, मकान की आवश्यकता है इलाज की जरुरत है इसकी पहचान तो सरकार के अधिकारी कर पाते हैं और ही चमचे किसी विधवा को सरकारी खजाने से आर्थिक मदद मिलने की प्रक्रिया होती है उसे बहुत भटकाया जाता है, हजारों रूपये रिस्वत में खर्चा हो जाते हैं तब कहीं मदद हो पाती है कास ये सहायता भी शराब जितनी आसान हो जाती

अन्य संबंधित पोस्ट पढ़ने के लिए  नीचे दी गयी पोस्ट की लिंक पर क्लिक करें।

थूंकना मना होता है, जहाँ पेशाब करना मना होता है अक्सर वहीं लोग थूंकते और पेशाब करते हैं। Click To Read

किसान क्रेडिट कार्ड लोन जिसकी तीस हजार है उसकी 15 हजार में निपटाई जा रही है क्लिक करके पढ़ें।

शेयर बाजार का लुभावना विज्ञापन आपको थोड़ी देर में अमीर बना देगा। Click To Read

       भारतीय चुनाव प्रणाली में शारब और धन का वितरण उम्मीदवार प्रत्यासी का बहुत खर्चा करवा देता है एक उम्मीदवार ने पंचयात चुनाव में ग्राम प्रधान बनने के लिए 50 लाख रुपये के लगभग खर्च किया है और वह ग्राम प्रधान बन भी गया है अब आप खुद ही सोचो जिसने 50 लाख रूपये खर्चा किया है वह इतना पैसा लाया कहाँ से है? सायद घोटालों से ही इकट्ठा किया है जब उसने 50 लाख रूपये घोटालों से इकट्ठा करके चुनाव लड़ा है उसे घोटाले करने की लत और अनुभव पहले से ही है आपकी ग्राम पंचायत में सरकारी खजाने से आये हुए विकास कार्यों के धन से कितना हिस्सा लगाएगा? सायद 10 से 20  % के आसपास ये जो 80% के आसपास का नुकसान हुआ है ये आपका ही था लेकिन भारतीय चुनाव प्रणाली में शराब और धन का वितरण ये नुकसान करवा रहा है ये हम समझ नहीं पा रहे हैं सायद कभी समझ भी नहीं पाएंगे क्योंकि भले लोगों की गिनती कम ही होती जा रही है

 

        दूसरा सबसे बड़ा नुकसान हमारा ये है कि हम स्वाभिमानी व्यक्ति हैं किसी से वोट देने के लिए तो शराब लेते हैं और ही धन लेते हैं उसके बाद हमें फिर भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है   जिसने अपने हिस्से की शराब और धन पहले ले लिया वह तो अपना लाभ इसी बहाने ले चुका है वह अपना लाभ उनसे भी ले चुका है जो चुनाव हार गये हैं उस शराबी और लालची के चक्कर में ईमानदार लोगों का नुकसान होता है   पंचायत चुनाव में कोई ईमानदार व्यक्ति चुनाव लड़ता है बो जीतेगा नहीं जो पहले से ईमानदार है उसके पास इतना धन नहीं होता है लोगों के बीच धन और शराब दोनों बाँट सके वोटर की मानसिक्ता दिनों दिन यही होती जा रही है धन और शराब नहीं तो वोट नहीं और ऐसे वोटर की गिनती भी बढती जा रही है सायद एक दिन ऐसा हो सभी यही कहने लगें भाई पहले धन और शराब दो उसके बाद वोट और यह नियम भी बना दिया जाये

 

       भारतीय चुनाव प्रणाली में धन और शराब का वितरण लोगों को सही दिशा तो नहीं दे रहा है इस बात की गंभीरता कौन लेगा में पोस्ट लिखने वाला और आप पढ़ने वाले मित्र अगर गंभीर हो भी जाते हैं तो उससे फायदा क्या होगा कुछ नहीं जिन्हें गंभीर होना चाहिए बो गंभीर नहीं हैं तो हम कर भी क्या सकते हैं

 

 

       अशिक्षा और बेरोजगारी - 

भारतीय चुनाव प्रणाली में शराब और धन का वितरण लोगों के अशिक्षित और बेरोजगारी का कुछ कुछ हिस्सा इस तरह से हैं भारत में हर छमाही कोई कोई चुनाव होता ही रहता है। जिससे लालची और शराबी लोग तो अपनी शिक्षा और ही अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देते हैं चुनाव का माहौल आता है शराबी को फ्री की शराब मिलती है जिसे वह जी भर के पीता है एक महीने बाद चुनावी सीजन खतम होता है उस शराबी को लत लगी है तो वह अपनी निजी थोड़ी बहुत कमाई से पीता है जिससे उसकी आर्थिक स्थिती ठीक नहीं हो पाती है वह अपने बच्चों की पढ़ाई आदि पर ठीक से ध्यान नहीं देता है

 

पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद आपका मिलते फिर किसी अनचाहे लेख के साथ 🙏🙏

 

No comments:

Post a Comment

Total Pageviews

पेज