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Monday, March 8, 2021

Panchayat Chunav से विकास की दर कई गुना बढ़ जाएगी बस एक वर्ष में दो बार होने लगें.

     Gram pradhan बनने के लिए आपके पास अगर 50 लाख रूपये नहीं हैं तो आप समाज सेवा का सपना छोड़ दो आप कभी ग्राम प्रधान नहीं बन सकते। ये हाल है Panchayat Chunav का।


         Gram Pradhan का चुनाव हर वर्ष हो या हर छमाही हो तो विकास की दर 50 गुना बढ़ जाएगी । ये हम ऐसे ही नहीं कह रहे हैं हमने और मेरी टीम ने एक सर्वे किया तब अंदाजा लगाया । मेरी टीम में कुछ ज्यादा लोग नहीं थे । सिर्फ में था और मेरा कंप्यूटर और पिछली वर्षों का रिकार्ड तो उसी सब से अंदाज लगाया । इस बार जब ग्राम पूर्व ग्राम प्रधानों के बस्ते जमा हो गये तो नये नये प्रधानी के उम्मीदवार तैयारी करने लगे । तैयारी में मुर्गा दारु तो आम बात है लेकिन अब कुछ हटकर होने लगा है । इस पोस्ट का लेख एकदम सत्य है इसमें कोई व्यंग जैसी भावना नहीं है।

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  Gram Panchayt में gram pradhan बनने से पहले ही कई लाख रूपये खर्चा किया जाता है।

      एक ग्राम पंचायत में जितना विकास एक पंचवर्षीय योजना में नहीं हो पाया उससे अधिक काम मात्र दो या तीन माह में हो गया । हमने अपनी एक पिछली पोस्ट में भी लिखा था आप अगर एक करोड़ रुपये खर्चा करते हैं तो ही आप प्रधानी का चुनाव लड़ सकते हैं जरुरी नहीं है उसके बाद भी प्रधान बन जाएं । उस पोस्ट को हमने व्यंग में लिखा था यदि आप पढ़ना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं । इस पोस्ट का हाल इसी में पढ़ लें । 



        एक ग्राम पंचायत में कई एक उम्मीदवार उतरते हैं चुनाव मैदान में तो वह सभी अपने अपने तरीके से खर्चा करते हैं । उस खर्चे का अभी सरकारी खजाने से कोई लेना देना नहीं है। बो यदि आप प्रधान बन जाते हैं तो चार गुना बसूल सकते हैं । अगर चुनाव हार गये तो सारा पैसा खतम । कोई प्रधान पद का उम्मीदवार पंचायत चुनाव से पहले अपने पैसे से दलालों के माध्यम से आठ दस बुजुर्गों की विधवा विकलांग की पेंशन बंधवा देता है जो पांच साल में नहीं हो पाता है ।  कोई प्रधान पद का उम्मीदवार प्रत्याशी पंचायत चुनाव से पहले अपने पैसे से खड़ंजा बनवा देता है कोई आर सी सी बनवा देता है । इतना सब काम पिछले पांच वर्षों में बिधायक जी न करवा पाए सांसद जी न करवा पाए ब्लाक प्रमुख और आदि आदि नहीं करवा पाए जितना  उम्मीदवारों ने करवा दिया ।


    किसी प्रधान पद के उम्मीदवार प्रत्याशी ने पंचायत चुनाव से पहले दो हजार साड़ी महिलाओ को बाँट दीं किसी ने पैरों के लिए चांदी की तोड़ियाँ बनवा दीं । तो इसीलिए मेरा मानना तो ये है ये प्रधानी का चुनाव हर छः माह में हुआ करे जिससे प्रधान बनने के बाद कोई काम हो या न हो । इसी होड़ में बहुत सारे काम निपट जाते हैं रहे बचे कामों में विधायक जी एक आध काम देख लेंगे और कोई देख लेगा इतने में छः माह खतम । फिर कुछ दिन में ये हो जायेगा जो चुनाव के पहले खर्चा किया है जीतने के बाद बसूली करना । जो हार गया उसका पैसा गया । 


  Panchayat Chunav में उम्मीदवार प्रत्याशियों की होड़।

      Gram Pradhan के चक्कर में कालोनी के कागज भी लोगों के लेलो यह कहकर अगर चुनाव जीत गया तो सबसे पहले आपका काम होगा । किसी गरीब की बेटी की शादी हो उसमें भी उम्मीदवारों से हजारों की मदद हो ही जाती है । इसी होड़ में किसी गरीब का चूल्हा भी कुछ दिन तक रोज जलता रहता है । इन सभी खर्चो को देखकर नहीं लगता है कि चुनाव सिर्फ पूँजीपति ही लड़ पाएंगे । जिसके पास पैसा नहीं है बो कभी चुनाव नहीं लड़ सकता है क्योंकि उसके पास खुद के खर्चे हैं नहीं तो वह चुनाव कैसे लड़ेगा । और अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र फिर बचेगा कहाँ । वोटर की भी मानसिकता ऐसी हो जाएगी कि जिसका खर्चा ज्यादा उसी का वोट । जो अधिक खर्चा करके चुनाव जीता है उससे अपनी बात भी नहीं कह सकते ।

      प्रधान पद का अम्मीदवार प्रत्याशी पंचायत चुनाव से पहले इतना खर्च करता है। आपको लगता है कि बो व्यक्ति समाज सेवा के लिए प्रधान बनेगा। अगर उसने 50 लाख रुपये खर्च किया है तो 1 करोड़ नहीं बल्कि 1.5 करोड़ रुपये उनमें से बचाएगा जो ग्राम विकास कार्यों के लिए आते हैं। यही सब आप लोग ऐसे लोगों को वोट देते रहे न तो आपका भला होगा न आपकी ग्राम पंचायत का।

       सबसे अच्छे दिन तो उन लोगों के आते हैं चुनाव के समय जो फ्री की दारु और मुर्गा खाते पीते हैं । अपना समय नस्ट करने के साथ माहौल बनाते हैं प्रधानों का लेकिन उनका कोई बजूद नहीं होता है जो किसे वोट करेंगे । उन लोगों को सिर्फ इंजॉय से मतलब है । वो लोग तो यही सोचते हैं हर रोज चुनाव हो कमसे दारू तीतर तब भी मिलता रहे । आज की पोस्ट में बस इतना ही । कुछ ज्यादा खास तो नहीं था आज की पोस्ट में बस एक आइडिया jलगाया कि ग्राम में विकास की दर बढ़ जाती है चुनाव के समय पर तो एक वर्ष में दो बार चुनाव हो जाया करें ये पांच वर्ष का झंझट खतम हो जायेगा।

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   एक panchvarshiy Yojna का कार्यकाल।

एक, Panchvarshiy Yojna का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है आप सभी जानते हैं। जो विकास पूरे पांच वर्षों में सरकारी योजनाओं से नहीं हो पाता है वह कार्य Panchayt chunav से पहले हो जाता है। कोई सरकारी योजना नहीं होती है। ग्राम प्रधान चुनाव जीतने से पहले यह सब करते हैं।

Panchayat chunav में ग्राम प्रधान का खर्चा।

  • Panchayat chunav में ग्राम प्रधान अनाप शनाप खर्चा करते हैं। हो सकता है उम्मीदवार प्रत्याशियों के खर्चे से कुछ दिन आपके अच्छे कट जाएँ लेकिन क्या आपको लगता है यह सब ठीक है!


  • Panchayat chunav ही नहीं कोई भी चुनाव हो अगर उम्मीदवार प्रत्याशी अधिक खर्चा करता है तो आप जानते हैं कि वह सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाएगा? नहीं!


  • अगर panchayat chunav में प्रत्याशी अधिक खर्चा कर रहा है तो गरीब वर्ग का व्यक्ति कभी chunav लड़ने की सोच भी नहीं पायेगा। इसलिए आपसे अनुरोध है अधिक खर्चा करने वाला प्रत्याशी आपको कुछ दिन तक खुश रख सकता है लेकिन आपको वास्तविक लाभ नहीं देगा। तो अपनी सोच को धीरे धीरे बदलने की कोसिस करें और ऐसे प्रत्याशियों को वोट देना बंद करें और कई लोगों को जागरूक करें।





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