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Saturday, February 27, 2021

ग्राम विकास अधिकारी से ग्राम का विकास हो न हो लेकिन खुद का खूब हुआ है।

  ग्राम विकास अधिकारी फर्जी काम करके लाखों की रिस्वत एक माह कैसे इकठ्ठा करता है।

( सरकारी योजना घोटाला )




     यूँ ऐसे नहीं हर किसी को ग्राम पंचायत अधिकारी की नौकरी मिल जाती है । उसके लिए काफी मेहनत और पैसा खर्च करना पड़ता है । आप यदि गरीब हैं पढ़ने में होसियार भी हैं लेकिन यदि पैसा नहीं है तो आप बड़े नसीब बाले हैं जो आपको यह नौकरी मिल जाये । ग्राम विकास अधिकारी की नौकरी आपको लगभग दस लाख रिश्वत देकर मिलेगी । और जब ग्राम विकास अधिकारी की नौकरी मिल जाये तो ये रूपया दोगुना क्या चार गुना से भी ज्यादा एक साल के अनुभव के बाद कभी भी एक साल में बसूल कर सकते हैं। अब आपको आम बात हो जाएगी आपके लिए कैसे कमाना है ये क्रम से बताते हैं ।

     

      1- ग्राम प्रधानों से कमीशन - 

       सबसे अच्छी कमाई आपकी इन्हीं से होगी । ग्राम पंचायत का जो भी काम है प्रधान कर तभी सकता है जबतक आप हाँ नहीं कहेँगे । कौन सा खड़ंजा उखाड़ कर फेंकना है कौन सा बनाया जाना है इस बात की मांग आपसे प्रधान करता जरूर है लेकिन आपकी मर्जी के बगैर कुछ नहीं । आपके साथ में जो भी अधिकारी काम करते हैं उनके साइन के बगैर ग्राम प्रधान कुछ नहीं कर सकता । ग्राम प्रधान आपको रिश्वत देता इसलिए है खड़ंजा की लम्बाई 100 मीटर है चौड़ाई 3 मीटर है । आपको पैसा 200 मीटर लम्बाई चौड़ाई 4 मीटर है पैसा इतना ज्यादा निकालना है । तो बिना जाँच किये प्रधान को इतना बजट थमा दिया है फिर आपकी सेवा पानी जरूर करेगा । गरीब आवास जिसके बनने चाहिए उस बात की जाँच आपको करनी भी है तो न के बराबर । प्रधान जिसके आवास बनवाना चाहता है उनके घर पहले से ही पक्के होते हैं । अब करना क्या है आपको वह फाइल आगे भेजनी है तो आपको कुछ न कुछ मिलेगा । और बो मिलेगा इसलिए क्योंकि प्रधान ने भी लिए हैं ।

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प्रधानमंत्री आवास योजना. 

     एक ग्राम पंचायत में जितने भी प्रधानमंत्री आवास बनाये जाते हैं, आवास बनने से पहले उनकी जाँच ग्राम विकास अधिकारी ही करता है। कौन सा व्यक्ति प्रधानमंत्री आवास के लिए पात्र है या नहीं है यह तय ग्राम विकास अधिकारी ही तय करता है। पर आपके गांव या कसवे में भी ऐसा जरूर हुआ होगा जो व्यक्ति आवास के लिए पात्र नहीं था उसे भी पात्र बना दिया जाता है। एक अपात्र को प्रधानमंत्री आवास के पात्र बनाना सब पैसे का खेल होता है। दलालों के माध्यम से, ग्राम प्रधान के माध्यम से रिश्वत पहुँचती है तो जिनके घर पहले से ही पक्के बने हुए हैं उनको भी प्रधानमंत्री आवास योजना का पात्र बना दिया जाता है।

      एक आवास के लिए 40 हजार से 50 हजार तक की रिश्वत ली जाती है। पूरा पैसा ग्राम विकास अधिकारी के पास नहीं जाता है। उस 40 हजार रूपये में कई हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा तो ग्राम प्रधान का ही होता है। और कई लोग उस रिस्वत् के पैसे में शामिल होते हैं।

   यह पोस्ट कोई काल्पनिक पोस्ट नहीं है। हो सकता है जहा आप रहते हैं वहां प्रधानमंत्री आवास के लिए कम रिश्वत ली गयी हो। लेकिन हमने कई ग्राम पंचायत के उन लोगों के बीच में बैठ कर बात की जिनके प्रधानमंत्री आवास बनाये गए थे। उन्ही लोगों ने बताया भाई हमसे ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री आवास के लिए 40 हजार रिश्वत ली है।

     नरेगा के द्वारा जिन चकरोड़ का निर्माण होना है वहाँ भी कितना काम हुआ उससे अधिक दिखाना है यार कुछ न कुछ आपको मिलेगा जरूर । अब जैसे किसी बुजुर्ग की पेंशन होनी है उस फाइल को नोट छापने की मशीन मान लो, आपको किसी न किसी माध्यम से करवानी है यार दलाल आपको कुछ न कुछ जरूर देंगे । ये काम आलसी गेंडे की तरह आपको बिना जाँच के करना है । जो पेंशन के लायक (पात्र) है उसे मिल जाये कोई दिक्कत नहीं । कुछ तो ऐसे लोग भी हैं लेकिन इतने गिरे हुए हैं जो खुद ब्लाक प्रमुख हैं और अपनी माता पिता की पेंशन ले रहे हैं। अब उनकी पेंशन आपने शुरू करवाई है गधे के चारे की तरह कुछ न कुछ सेवा पानी जरूर मिलेगा ।

      मनरेगा के अंतर्गत कई ऐसे तालाब खोदे गए जो आज तक पता ही नहीं चला कहाँ पर खुदे हैं। उन तालाब की खुदाई का पैसा फर्जी ड्यूटी के माध्यम से रोजगार सेवक ने कमा लिए और ग्राम विकास अधिकारी को मतलब ही नहीं है कि विकास का तालाब बने या न बने मेरी जेब में कुछ आना चाहिए।

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      एक ग्राम विकास अधिकारी के पास इतना टाइम नहीं होता है जिससे वह विधवा का तत्काल प्रभाव से काम कर सके। कितना भी लम्बा प्रोसेस हो किसी कार्यवाही का एक अधिकारी चाहे तो समय पर कर सकता है। कई विधवा तो ऐसी होती हैं जिनको आर्थिक मदद मिल ही नहीं पाती है। यह सब इसलिए होता है उसकी सूचना और कार्यवाही के लिए कोई आगे आने वाला ही नहीं होता है। अगर किसी से गुहार लगाती भी है तो दलाली बीच में आ जाती है। वहीं विधवा कई लोगों के पास दलाली देती है लोग ठग कर चले जाते हैं और पैसा नहीं मिलता है। एक ग्राम विकास अधिकारी चाहे तो हफ्ते में एक बार भी पंचायत भवन में बैठे तब भी पूरी ग्राम पंचायत का कार्य समय पर हो सकता है. लेकिन नहीं है ग्राम विकास अधिकारी पास समय ही नहीं है पंचायत भवन तक आने का।

         कोई बिधवा हो गयी उसका जीवन पटरी पे रहे इसलिए तो उसे आर्थिक मदद मिलती है सरकारी खजाने से । आपको उसे आर्थिक मदद दिलवाने के लिए इतने बहाने बनाने हैं जैसे बन्दर का खेल जिससे वह विधवा किसी दलाल के पैर छुए जाकर जिससे आपको दलाली का जुगाड़ हो तब कहीं उसका काम करना है । जब वह फाइल आपके पास एक दलाल के माध्यम से आयी है तो भिखारी की तरह कुछ न कुछ हासिल हो ही जायेगा । क्योंकि आप इतने ब्यस्त हो जाते हैं जो भी ग्राम पंचायत आपको नौकरी के मिली है उसमें लोगों के पास तो जाना ही नहीं है । दलाल खुद आपको ढूंढ लेंगे ।



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