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Wednesday, February 24, 2021

सरकारी स्कूल ( government school )हैं या अशिक्षित रखने का सडयंत्र ।

 सरकारी स्कूल हैं या अशिक्षित रखने का सडयंत्र ।



     लेख के टाइटल से आपको महसूस हुआ होगा कि ये लेख किसी प्रोपोगेंडा के खिलाफ है, या खुद में एक प्रोपोगेंडा है । तो आप इस बात से दूर रहें में किसी संगठन का हिस्सा नहीं हूँ ना ही में किसी पार्टी का कार्यकरता । इस लेख के माध्यम से सिर्फ आपको हिंदुस्तान की पढ़ाई में जो दुर्दशा घुली है उसके बारे में लिखते हैं । 


        सरकारी स्कूल ( government school ) में मेरी भी पढ़ाई किसी उच्च स्तर की नहीं है लेकिन जिस हिसाब से हम पढ़ कर आये हैं जितना भी पढ़े तो पढ़ाई के लिए समय अधिक दिया जाता था । जुलाई के आरम्भ से ही क्लास लगनी शुरू हो जाती थीं और निरंतर सरकारी स्कूल ( government school ) में  नयी वर्ष की 20 मई तक जाना पड़ता था । त्यौहार की छुट्टी ही नसीब होती थीं घर रहने के लिए । किसी दिन हल्की सी बीमारी का बड़ा बहाना लेकर घर रहने का मौका मिल जाता था उसमें भी अगर माँ बाप को सक हो गया तो ठुकाई पक्की । या फिर अपने बीमार होने की खबर सरकारी स्कूल ( government school ) में  न भेजी किसी के द्वारा तो स्कूल में ठुकाई पक्की । ठुकाई के डर की वजह से हल्की फुल्की बीमारी के लिए न तो अध्यापक से कहते थे न ही घर पे । महीने के चार दिन रविवार के मिलते थे उसमें समझ भी नहीं आता था शाम कब हो गयी । पूरे क्लास में अपने आपको होसियार साबित करने के हर प्रयास करना होता था । सरकारी स्कूल ( government school ) में  अगर पढ़ने में कमजोर है कोई तो उसे सबसे पीछे बिठाया जाता था । और उसे निर्देश दिए जाते थे अगर तुम कल 20 तक पहाड़ा सुना दोगे तो आगे बैठोगे । कुछ राजनीत करने वाले लोग तो ये कहते हैं मुझे जाति विशेष की वजह से सरकारी स्कूल ( government school ) में  पीछे बैठना पड़ता था । सायद कोई अध्यापक हो ऐसा  मानसिक रोगी पर में जिस स्कूल में गया कोई भेदभाव नहीं था । पानी पीने के लिए स्वक्षता पसंद करते हैं सरकारी स्कूल ( government school ) में अध्यापक उस बच्चे से मांगवाते थे जो साफ सुथरा होता था लोग गुमराह तो करते हैं जाति जैसा कोई बंधन नहीं था । ये तो पहले की बातें हो गयी । 




      अब उस दौर की शुरुआत करते हैं सन 2006 । हमारे उत्तर प्रदेश में परीक्षा के लिए नकल जैसी कोई सुविधा नहीं थी । लेकिन 2007 में दसवीं की परीक्षा के पहले हम सोच रहे थे मेरा क्या होगा में कम होसियार हूँ । कैसे पास हो पाउँगा हजारों सवाल । लेकिन नकल की सुविधा ने सरकारी स्कूल ( government school ) में  सरल कर दिया । और हाँ नकल करने के लिए सिर्फ उनको दी जा रही थी जो सरकारी स्कूल ( government school ) में  अध्यापकों के करीबी थे । उसके बाद जिन क्षात्र कों नकल दी रही थी बो मेरे और बाकी लोगों के करीबी थे । थोड़ी बहुत सहायता मिल रही थी। ऐसा ही चलता रहा बो समय आ गया क्षात्रों ने पढ़ना ही बन्द कर दिया सिर्फ नकल ही सबकुछ हो गया । जब नकल से पास हुआ हूँ तो दीमाग में तर्क शक्ति कितनी मजबूत होगी । अच्छी जॉब मिलना मुश्किल हो गया अच्छा सोचना मुश्किल हो गया ।  परीक्षा के दौरान कैमरे लगवा भी दिए गये उसके बिरोध में जो स्कूल के प्रबंधक हुआ करते हैं बो किसी न किसी पार्टी से जुड़े होने की वजह से क्षात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काना शुरू किया ये बात क्षात्र नहीं समझते हैं कि मेरे लिए ये अच्छा है । बो खुद वर्तमान सरकार को गाली देने लगे । अगर पहले से तैयारी की होती तो न ही सरकार को गाली देनी पडती न ही कम नंबर या फेल होने की शर्मिंदगी देखनी पडती । 




   सरकारी स्कूल ( government school ) में  क्षात्र पढ़ें भी कब जुलाई सिर्फ एडमिशन में चला जाता है । अगस्त सेटेलमेंट में । सितम्बर में अध्यापक को जनगणना का काम थमा दिया जाता है । फिर ये काम बो काम इतने काम क्लास चलती ही नहीं । जनवरी से परीक्षा की तैयारी बो भी क्षात्रों की नहीं अध्यापकों की। परीक्षा के बाद खतम । आठवीं तक का तो ये हाल है बच्चे और अध्यापक खाने के चक्कर में निकल जाता है । कक्षा एक का क्षात्र पाँचवी तक पढ़ते पढ़ते पूरे फेमिली के नाम लिखना नहीं सीख पाता है । यहाँ साला हम लोगों को गुरूजी ने कूट कूट कर इतना दुरस्त कर दिया था जब कक्षा दो में पहुँचता था तो इमला लिखना सीख गया था हल्की फुल्की । 


      सरकारी स्कूल ( government school ) में जो क्षात्र बाहरवी कक्षा में पढ़ रहा है बो अभी भी हिंदी से अंग्रेजी में परिवर्तन एक सादा सा वाक्य नहीं कर पाता है ।  सरकार पढ़ाई के लिए किताबें कपडे बजीफा बहुत मदद मिलती है। मेरे जमाने में ये सब सुविधा नहीं थी, थी भी तो मेरे लिए नहीं थी क्योंकि हम उस सूची में नहीं थे । 

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    ये सब तो ठीक है जैसा भी है क्या आपको नहीं लगता है कि पढ़ाई के नाम पर सरकारी स्कूल ( government school ) में  हमलोगों के बच्चों के साथ खिलवाड़ जैसा कुछ हो रहा है । किसी ना किसी बहाने से पूरा वर्ष बर्बाद कर दिया जाता है लेकिन पढ़ाई ढंग से नहीं होती है । कोरोना महामारी इस वर्ष आ गयी उसके पहले भी वही हाल था । सरकारी कर्मचारी के बच्चे सायद इसीलिए सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ते हैं उनको लगता है वहाँ भविष्य अंधेरे में है । बो पहले से सरकारी कर्मचारी है सक्षम है उसके बच्चे और भी सक्षम हो जायेंगे । जो सरकारी स्कूल की सुविधाओं के चक्कर में है बो भिखारी का भिखारी ही रहेगा । में किसी सरकार के बिरोध में नहीं हूँ । ये जो सरकारी सुविधाओं का खेल है हम लोगों को आवास फ्री बिजली पानी राशन के लिए हमेसा हाँथ फैलाने वाला बना रहीं हैं । जो मिल रहा है उसे तो लेते ही रहो लेकिन अपना भविष्य भी देखते चलो । एक पोस्ट में हमने सरकारी स्कूल का जिक्र किया था आप उसे भी पढ़ सकते हैं ।


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      मेरा कहना ये है आप सरकारी स्कूल ( government school ) में पढ़ो या प्राइवेट मन लगा कर पढ़ो । जितना हो सके सीखते रहो । अगर आपको स्कूल में नहीं पढ़ाया जा रहा है किताबें लाकर घर पर पढ़ो । मोबाइल है तो इंटरनेट से पढ़ो कैसे भी हो पढ़ो सीखो । ये सरकारी स्कूल ( government school )   आपका समय नस्ट कर रहे हैं जबतक सुधार होगा तबतक कुछ खुद ही सीखते रहो । अगर आपके पास स्मार्ट फोन है तो सिर्फ नाच गाना देखने के लिए नहीं है सीखने के लिए भी है । 






  आज के लेख में बस इतना ही अगर कोई गलती हो तो माफ़ कर दें और कमेंट में लिख दें जरुर सुधार करेंगे ।

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