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Wednesday, February 3, 2021

वैश्या कोई ऐसे ही नहीं बन जाता है बना भी दिया जाता है। वेश्यावृत्ति धंधा करने वाली

   वैश्या नाम ख़राब जरूर है लेकिन आप जानते हैं कई वैश्याओं के सामने बहुत सी मुस्किले होती हैं।

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         वेश्या का नाम वैसे तो ख़राब ही है जो भी देखता है बस हवस सिर पर सवार हो जाती है । कोई भी ठीक ठाक नजरों से देखता ही नहीं है । लोगों की मानसिक्ता हमेशा यही रहती है वह मूड में है । उसको क्या तकलीफ है किसी को क्या मतलब पैसे दिए हें तो वसूल तो करने ही होते हें । 

         वह ऐसे माहौल में ढल चुकी होती है उसके सामने वर्दी वाले भी आ जाएं झुककर बात नहीं करती बो बिना डरे बिना शर्म के वो इसलिए नहीं करती है उनके सामने खाकी और खादी वाले जो कानून के रखवाले होते हैं भी बिना कपड़ों के हो चुके होते हें । 

        उसके मन में घर में भगवान तो होते हें डर और लज्जा उनकी भी नहीं होती । गलियां और भाषा तो मधुर होती ही नहीं है आपने प्यार दिखाने की कोसिस की तो उनका जबाब बड़ा धाँसू रहता है ( चल अपना काम निकाल और ज्ञान मत दे तेरे जैसे वहुत आते हें टांगो के बीच ) उन्हें कोई सगा तो लगता ही नहीं है उनके कोठे तक के सफर में जो भी सगा बनने आया बस जिस्म नोचने के लिए मीठा बन रहा था । वेश्यावृत्ति धंधा करने वाली 


वेश्यावृत्ति धंधा करने वाली
वेश्यावृत्ति धंधा करने वाली

                 इतनी डिटेल आपको बताई ये कम है कहानी तो अब शुरू होती है । सन फरवरी 2016 की बात है दिल्ली घूमना हुआ तो एक वेश्या के बारे में जानने का मन हुआ तो उससे बेहतर कौन जान सकता है तो मैंने उसी से मिलने का प्लान बनाया । किसी वैश्या से मिलने के लिए एक ग्राहक ही बनना पड़ता है । क्या तरीका अपनाएं जो किसी से एक आध घंटे बात करने का मौका मिल जाये मन में कई सवाल गूँज रहे थे । मेरे दिमाग़ में तो सिर्फ इतना ही चल रहा था कि मुझे कुछ सवाल पूंछने हें । लेकिन सामने वाला ये नहीं सोचता है, में अगर मंदिरा पान नहीं भी करता हूँ अगर ठेके के पास खड़ा हूँ तो देखने वाले यही सोचेंगे लगता है आज पियेगा । 

    मेरे पैर जमीन से चपक ही न रहे हों ठीक वही हाल था मेरा इशारों में पूंछते हुए उस गली कि तरफ आगे भी बढ़ रहा था । चेहरे पर एक अजीब सी गर्माहट थी जो किसी गलती को जानबूझकर करते समय पहली बार सभी को होती है । हालांकि एक दोस्त ने पहले बताया था कि अगर चाहो तो वह तुम्हारे कमरे पर भी आ जाएगी उसका चार्ज 5000 से ऊपर होगा । 

      और अगर तुम्हारे पास कमरा नहीं है तो होटल में तुम्हारे लिए ये ब्यवस्था भी हो जाएगी लेकिन ये उससे भी महंगा है । अब मुझे तो कुछ जानकारी चाहिए थी क्यों इतना खर्चा करूँ मेरे पास इतना बजट भी नहीं था । और अगर इधर उधर करके होटल आदि में चला भी जाता तो सायद मुझे जो पूंछना था वो नहीं मिलता । लेकिन कुछ दूर चलने के बाद वहां पैदल ही पहुँचने वाला था ।

     इस बात कि भनक मुझे ऐसे लगने लगी वहाँ से जो भी बापस आ रहा था जैसे में महा पाप करके लौट रहा हूँ उसकी नजरें झुकीं हुयीं थीं और जो जा रहा था बो भी नज़रें किसी से नहीं मिला रहा था । सब अपने अपने सरपट चले जा रहे थे । ये सब देख एक सवाल आया आखिर इतनी शर्म से आँखे झुक जाती हें कहीं जाने से तो जाते ही क्यों हो ।

धंधा करने वाली का नंबर
धंधा करने वाली का नंबर 


      में उस मोहल्ले में दाखिल हो ही शरीर गर्म सा महसूस होने लगा,गया रोंगटे खड़े हो गए आखिर में आया कहाँ हूँ । थोड़ी सी जानकारी लेने यार इधर उधर से पूँछ लेता । किसी के पास बैठकर उसके बंद कमरे में जाकर अकेला होऊंगा बो मादक लगेगी सायद बहक ही ना जाऊं सारा ज्ञान ख़त्म हो जाये, आज ये पोष्ट लिख रहा हूँ इसे लिखने के लायक भी न बचूं । अब जब आ ही गया हूँ तो थोड़ा साहस किया और एक दम अयाशी वाले किरदार में तो था ही । कोई चबूतरे पर बैठ कर इशारे कर रही थीं तो कोई छज्जे पर कोई खिड़की पर अपने अपने ग्राहक का इंतजार था । एक महिला के पास गया उसकी उम्र वही  30 से थोड़ी अधिक होगी ।

कैसे आया - क्या चाहिए

में - कुछ नहीं बस इधर घूमने आया हूँ।

बो -क्यों तीरथ है इधर, कितना देगा ।

नहीं में वो नहीं करूँगा ।

बो -क्यों तो करवाएगा ।

में -नहीं बहिन जी ऐसी बात नहीं ।

बो -संस्कारी कि गा@@@ बहिन बनाएगा चल बोनी ख़राब कर दी ।

        में  वहाँ से सरपट निकला उसने इतनी हवा जो भरदी मुझे जबाब अपने सवालों के चाहिए लेकिन उत्तर उसके सवालों के नहीं दे पाया । दूसरी तरफ बढ़ा क्या करूँ कैसे बोलूं क्या बोलूं किस बात से शुरुआत करूँ । तभी एक 40 साल कि महिला ने बुलाया।

बो -क्यों क्या हुआ कितने मांग रही थीं 100 कम देदे आजा । (में चला गया थोड़ी हिम्मत कि उसके पास बैठ गया )क्यों पहली बार आया है इधर

जी

बो -इधर का चस्का मत डाल लत लग गयी इधर का कमाया इधर ही गमा देगा । कितना देगा?

में -जी 500 बस एक घंटे आपसे बात करनी है और कुछ नहीं ।

बो -पागल है तूँ बात करने का 500 देगा पूरी रात बातें कर ले 1000 हजार दे । आज की रात  मेरा भी शरीर टूटने से बच जायेगा पता नहीं कोई फस गया तो दसा बिगाड़ देगा ।


में -नहीं मेरे पास इतना नहीं है ।

बो -800 दे पूरी रात रुक बातें भी कर मन हो तो मजे भी कर ।

में -नहीं मजे नहीं बस कुछ बातें पूछनी हें

बो -तो ऐसे ही यहीं पूँछ जो मर्जी आये दे देना ।

में -जी ठीक हे आप यहाँ ये काम क्यों करती हो?

बो -महीने का खर्चा दे दिया कर छोड़ दूंगी ।

में -नहीं में खर्चा तो नहीं दे पाउँगा इतनी ओकात नहीं है मेरी।

बो -तो इधर आया है यहीं के जैसी बात कर मिनिस्टर न बन ।

में - नहीं मेरा मतलब आप किसी कम्पनी में काम कर लो इतनी तनख्वा तो मिल ही जाएगी जो खर्चा चलता रहेगा ।

बो - गयी थी एक साल सुपर वाइजर ठेकेदार, मालिक सब चढने को घुमते हैं । जो वहाँ वही यहाँ । इतने उसका एक ग्राहक आया और वह हाथ दिखाते हुए मुझे गाली देकर आगे चली गयी ( खामखां टाइम बर्वाद करने में लगा है चल जा कहीं और देख )

        इतनी जानकारी फ्री में मिल गयी और साथ में गलियां भी । लेकिन मुझे जो उत्तर चाहिए बो नहीं मिले। थोड़ा आगे बढ़ा तो 25 या 26 के आसपास कि एक महिला मिली और वही तरीका उसका भी बुलाने का बात करने का । 2000 डिमांड थी। मैंने ये कहकर सौदा पक्का कर लिया 1000 दूंगा करना कुछ नहीं बस आपसे 1  घंटे बात करनी है

बो -एक घंटे में दो निपटाउंगी

तो आधा घंटे कर लो 500 ले लेना

बो -आजा कमरे तुझे भी देख लूँ ऐसी क्या बात है जो बात करने का 500 देगा ।

जी हम जो आपका टाइम बर्बाद कर रहे हैं उसकी कीमत दे रहे हैं थोड़ी सी (  और उसके पीछे पीछे कमरे तक जा पहुंचा उसके बेड पर अपना पिट्ठू रक्खा बैठे गया पास में । पानी भी पूंछा हमसे पर मेरा मन नहीं हुआ पता नहीं क्यों ।

बो -पूंछो क्या पूंछना है ।

में -आपने पढ़ाई क्यों नहीं की?

बो -पढ़ी हूँ 8 तक

में -आगे क्यों नहीं की?

बो - कोई पढ़ाने वाला नहीं था

में - माँ बाप नहीं हैं

बो - बाप है नशा करते हैं माँ जब हम 8 में पढ़ते थे मर गयी

में - तो बाप ने खर्चा नहीं दिया

बो - मुझे बो अपनी औलाद नहीं मानता मेरी माँ भी वही करती थी जो में कर रहीं हूँ । इसलिए बाप को सक है ये मेरा खून नहीं है ।

में - तो आप पहले कहाँ रहतीं थीं ।

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         बो - हम रहते तो यहीं थे मेरी माँ शुरू से इसी धंधे में थी सादी से पहले मेरा बाप रोज मेरी माँ के पास आता था और दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया । पूरे मोहल्ले में इस बात की खुशी थी कि आखिर कोई रंडी कि शादी हो रहीं है । वरना हम रंडियों को यूज़ के आलावा अपनाता ही कौन है । फिर पिता के कहने पर माँ ने धंधा छोड़ दिया और यहीं रहने लगे पिता कम्पनी में ड्यूटी करने जाते माँ घर रहती एक साल बाद जब मेरा जन्म हुआ उसी दिन से पिता ने कलेश शुरू कर दिया बोले में ड्यूटी करता रहा ये यहाँ मजे करते रहीं उसी से जन्मी है ये लड़की. ( ऐसा मुझे माँ ने बताया ) फिर कलेश के बढ़ते पिता चले गए कहीं माँ अकेली फिर से हो गयीं । मजबूरी में फिर उसी धंधे में आना पड़ा लेकिन मुझे दूर रखा । और हमसे यही कहती रहीं बेटा पढ़ लिख जाना कहीं अच्छी सी नौकरी कर लेना लेकिन किसी से प्यार और धंधा मत करना । कभी कभी नसीहत देतीं कि इस गली में कई एक लड़कियां हैं जो प्यार के चक्कर में पड़ गयीं और अपने आशिक के साथ भागी यहाँ बेच दी गयीं । में छत वाले कमरे में रहती माँ जो भी करती थीं में न जान जाऊं तो छुपकर रहती थीं मेरी उम्र बढ़ती गयी । वैसे वैसे माँ ख्याल रखतीं गयीं मेरा कि किसी ग्राहक कि नजर हमपर न पड़ जाये ।

में - तो जब आपकी माँ ने इतना कुछ सिखाया फिर भी आप इस धंदे में ।


बो - जिस दिन माँ मरी थी उस दिन मेरी उम्र 13 साल भी नहीं थी ( खिड़की से एक व्यक्ति कि तरफ इसारा करते हुए बताया ) इसने मेरा सौदा कर दिया था जबकि मुझे बेटी मानता था । उस रात हमें दो लड़कों ने रौंदा था । बाप का साया भी नहीं है कभी कभार आते हैं गाली गलौज करके चले जाते हैं बस निकाल इसलिए नहीं पा रहे ये घर मेरे नाम है पहले माँ के नाम था मुझे वारिश बना दिया था तो मेरे नाम हो गया है ।

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में - तो आप इस धंधे से निकल क्यों नहीं जाती ।

बो - कहाँ जाऊं कोई नहीं अपना रहा  है  यहीं रहूंगी कोई सादी करेगा तो ठीक है । बूढी हो जाउंगी औरों कि तरह मुझे भी गटर में बहा दिया जायेगा । यहाँ कोई अपना नहीं है सबको धंधे से मतलब है हम लोगों के वोट भी बने हैं तो सिर्फ वोटर के रूप में देखे जाते हैं । बाकी कुछ नहीं हम लोगों के बच्चे स्कूल भी जाते हैं तो वहाँ और लड़के या अध्यापक जान जाते हैं ये किसी वैश्या का लड़का है तो वर्ताव भी अच्छा नहीं करते ।

में - लेकिन जो लड़कियां एक एक रात का 15000  से अधिक लेतीं हैं  वो कैसी होती हैं ।

बो - बो अच्छे खानदान से भी होती हैं उनको कोई जान भी नहीं पाता कि ये रंडी है । उनके पास अच्छी गाडी बगैरा सब होती है । बो सिर्फ अपना खर्चा पूर्ती के लिए ये सब दलालों के माध्यम से करतीं हैं । उनका खानपान अच्छा होने कि वजह से शरीर का मेंटेन भी ख़राब नहीं होता । और बो रोजाना कई ग्राहक नहीं ढूंढती एक ही काफी है ।इतने ही सवाल पूंछकर थोड़ा दुख मुझे भी हुआ । सवाल बंद कर दिए और तय रेट के हिसाब से 500 रुपये बेड पर रख दिए खुद के हांथो से फ्रीज़ से पानी कि बोतल निकाली दो घूँट पिए और चल दिया ।

     उसने मुझे रोका और रुपये बापस करने लगी और बोली ले जाओ आप पहले आदमी हो जो बिना काम के पैसे दे रहे हो । तो मैंने कहा मेरा यहीं काम है । और रुपये बापस बेड पर फेंक दिए । उसके बाद उसने कहा अगर बात करनी हो तो फिर आ जाना कोई पैसा नहीं लूँगी बस थोड़ी देर बातें कर लिया करना यहाँ तो जो भी आता है बस अपना गुस्सा ठंडा किया चल दिया । मुझे वहाँ दोबारा तो नहीं जाना था बस हाँ में हाँ मिलाकर चला आया । उसके दिल में एक घुटन थी तो सायद बो हमसे कहना चाहती थी हम किस किस कि घुटन सुनते । उस गली में तो हर महिला कि अपनी कहानी होगी । ये कहानी ही न बने कुछ ऐसा होने लगे ।

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               बहुत से सवाल थे जो उस वक्त याद नहीं आये । और भी एक आध सवाल होंगे लेकिन आज चार साल बाद लिख रहा हूँ कुछ भूल भी चुका हूँ । इस लेख में सभी सवाल असली हैं, सभी जबाब असली हैं । बस लिखते वक्त थोड़ी भाषा का बदलाव कर दिया है । और दो या तीन अलग अलग उत्तरों को एक में ही जोड़ दिया है ।

पूरा पढ़ने के लिए आपने इतना समय दिया उसके लिए धन्यवाद। मिलते हैं अगले लेख में ।

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